बिना मान्यता चल रहा था आवासीय मदरसा, बच्चियों से कराते थे घर के काम, डंडे से पिटाई के आरोप

दारूल कुरआन की निरीक्षण रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे, 4 साल की बच्ची भी मिली; 36 बिंदुओं पर कार्रवाई की सिफारिश
ग्वालियर। शहर के मदरसा दारूल कुरआन की निरीक्षण रिपोर्ट में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और देखभाल से जुड़ी कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मदरसा बोर्ड की मान्यता के बिना आवासीय मदरसा संचालित किया जा रहा था। यहां रहने वाले कई बच्चे स्कूली शिक्षा से वंचित थे। वहीं, बालिकाओं से घर के काम कराने और काम में गलती होने पर डंडे से पिटाई किए जाने के आरोप भी निरीक्षण में सामने आए हैं। निरीक्षण टीम ने अपनी रिपोर्ट में 36 बिंदुओं पर निष्कर्ष देते हुए कड़ी कार्रवाई के सुझाव दिए हैं।
कई राज्यों के बच्चे मिले, स्कूल नहीं भेजे जाने की बात सामने आई
निरीक्षण के दौरान मदरसे में 18 बालक और 8 बालिकाएं मौजूद मिलीं। वहीं, दस्तावेजों में 42 बालकों और 16 बालिकाओं के पंजीयन फॉर्म पाए गए। बच्चों की उम्र 4 से 14 वर्ष के बीच बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यहां रहने वाले बच्चों को कभी स्कूल नहीं भेजा गया, जिसके कारण वे औपचारिक स्कूली शिक्षा से वंचित रहे। मदरसे में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार के बच्चे भी मिले। निरीक्षण में दो बालकों के माता-पिता की मृत्यु होने की जानकारी भी सामने आई।
संचालन समिति ने नहीं दिया आय-व्यय का ब्योरा
दस्तावेजों के अनुसार, मदरसे का संचालन अंजुमन इस्लाहे मुशायरा समिति द्वारा किया जा रहा था। निरीक्षण टीम को संचालन समिति की ओर से आय-व्यय का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि मदरसा बोर्ड की मान्यता के बिना आवासीय व्यवस्था संचालित की जा रही थी।
बालिकाओं के लिए महिला वार्डन नहीं, शौचालयों में भी मिलीं खामियां
निरीक्षण रिपोर्ट में बालिकाओं की देखभाल के लिए महिला वार्डन नहीं होने की बात सामने आई। वहीं, बालकों के शौचालयों में दरवाजे नहीं थे और कई बच्चे एक साथ शौचालय का इस्तेमाल करते थे। रिपोर्ट में इन व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
बालिकाओं से झाड़ू-पोंछा और कपड़े धुलवाने के आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, मदरसे में रहने वाली बालिकाओं से झाड़ू-पोंछा लगाने और कपड़े धोने जैसे घरेलू काम कराए जाने की जानकारी मिली। काम में गलती होने पर डंडे से पिटाई किए जाने के आरोप भी सामने आए। मदरसे में सबसे छोटी बालिका की उम्र चार वर्ष बताई गई है। निरीक्षण के दौरान तीन बालिकाओं को शिशु गृह भेजा गया।
बीमार बच्चों के उपचार और अभिभावकों को सूचना देने पर भी सवाल
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि बच्चों के सामान्य रूप से बीमार होने पर चिकित्सकों से परामर्श नहीं लिया जाता था। गंभीर बीमारी की स्थिति में भी माता-पिता को जानकारी नहीं दिए जाने की बात रिपोर्ट में दर्ज की गई है। बालिकाओं से 800 रुपये और बालकों से 500 रुपये शुल्क लिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
जिला न्यायाधीश ने बच्चों से किया संवाद
निरीक्षण के दौरान जिला न्यायाधीश रुचिका चौहान ने मदरसे में रहने वाले बालक-बालिकाओं से संवाद किया। निरीक्षण टीम में सहायक संचालक, शिक्षा विभाग के परियोजना समन्वयक, महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी, बाल कल्याण समिति ग्वालियर तथा अन्य विभागीय अधिकारी शामिल थे।
टीम ने निरीक्षण के बाद 36 बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिसमें बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवासीय व्यवस्था और मदरसे के संचालन से जुड़ी खामियों को रेखांकित करते हुए कड़ी कार्रवाई के सुझाव दिए गए हैं। अब रिपोर्ट के आधार पर संबंधित विभागों की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
