महलगाँव के उपकेंद्र के कर्मचारी आवासों को गिराने की कार्रवाई पर रोक लगाने की माँग=विद्याकांत मिश्रा

बिना निष्पक्ष तकनीकी जाँच के कार्रवाई अनुचित—संघ ने उच्चस्तरीय स्वतंत्र जाँच समिति गठित करने की उठाई माँग
ग्वालियर। मध्य प्रदेश संविदा एवं ठेका श्रमिक कर्मचारी संघ (इंटक) ने कार्यपालन अभियंता परीक्षण संभाग – 2 मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड ग्वालियर के अंतर्गत 220 के. व्ही. उपकेंद्र परिसर, महलगाँव, ग्वालियर में स्थित कर्मचारी आवासों को जर्जर एवं असुरक्षित घोषित कर उन्हें खाली कराने तथा गिराने की प्रस्तावित कार्रवाई पर कड़ा विरोध व्यक्त किया है।
संघ ने मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड, जबलपुर के प्रबंध संचालक एवं माननीय ऊर्जा मंत्री जी मध्य प्रदेश शासन , प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश शासन , प्रबंध संचालक मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल को पत्र प्रेषित कर इस कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने, आवासों की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष तकनीकी परीक्षण कराने तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जाँच के लिए उच्चस्तरीय स्वतंत्र समिति गठित करने की माँग की है।
1. कर्मचारियों ने अपने निजी खर्च से कराई आवासों की मरम्मत
संघ के अनुसार, आवासों के नियमित संधारण एवं मरम्मत की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण संबंधित कर्मचारियों ने अपने निजी संसाधनों से प्रति आवास लगभग ₹1,50,000 से ₹2,00,000 तक खर्च कर वाटरप्रूफिंग, मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण जैसे कार्य कराए हैं।
ऐसी स्थिति में यह आवश्यक है कि आवासों की वर्तमान स्थिति, पूर्व में कराए गए मरम्मत कार्यों तथा उनके रखरखाव से संबंधित अभिलेखों की जाँच की जाए। बिना किसी स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण के केवल विभागीय रिपोर्ट के आधार पर आवासों को अनुपयोगी घोषित कर गिराने की कार्रवाई करना अनेक गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
2. प्रत्येक आवास का स्वतंत्र स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराया जाए
संघ ने माँग की है कि भवनों की सुरक्षा का आकलन किसी एकतरफा विभागीय रिपोर्ट तक सीमित न रखा जाए। इसके लिए योग्य एवं अनुभवी सिविल इंजीनियरों तथा संरचनात्मक विशेषज्ञों की स्वतंत्र समिति गठित की जाए।
समिति द्वारा प्रत्येक आवास का पृथक-पृथक निरीक्षण कर भवन की नींव, कॉलम, बीम, छत, दीवारों, दरारों, नमी तथा पूर्व में कराए गए मरम्मत कार्यों का परीक्षण किया जाए। इसके बाद प्रत्येक आवास के संबंध में स्पष्ट निष्कर्षों वाली लिखित तकनीकी रिपोर्ट जारी की जाए।
यदि कोई आवास वास्तव में असुरक्षित पाया जाता है, तो उसके संबंध में नियमानुसार आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाएँ। वहीं, यदि मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण से भवन को सुरक्षित बनाया जा सकता है, तो बिना उचित तकनीकी आधार के उसे गिराने के बजाय मरम्मत का विकल्प भी विचाराधीन रखा जाए।
3. भवनों की आयु एवं वास्तविक स्थिति के आधार पर निर्णय लिया जाए
संघ ने कहा है कि किसी भवन को केवल उसकी अनुमानित आयु के आधार पर स्वतः जर्जर या सुरक्षित घोषित नहीं किया जा सकता। भवन की निर्माण पद्धति, प्रयुक्त सामग्री, रखरखाव, संरचनात्मक स्थिति और तकनीकी परीक्षण के निष्कर्षों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
आरसीसी फ्रेम संरचना तथा ईंट-चूने के गारे से निर्मित भारवाही भवनों की उपयोगी आयु अलग-अलग हो सकती है। इसलिए संबंधित भवनों की वास्तविक निर्माण तिथि, स्वीकृत निर्माण अभिलेख, लागू तकनीकी मानक तथा सक्षम विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए।
संघ ने माँग की है कि भवनों की आयु और सुरक्षा से संबंधित लागू शासकीय नियमों एवं तकनीकी मानकों का उल्लेख करते हुए जाँच रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि निर्णय पारदर्शी, तथ्यपरक और जवाबदेही के सिद्धांतों के अनुरूप हो।
4. संधारण में लापरवाही की जाँच हो, जिम्मेदारी तय की जाए
संघ ने यह भी प्रश्न उठाया है कि यदि कर्मचारी आवास लंबे समय से विभागीय परिसर में स्थित हैं, तो उनके नियमित संधारण, मरम्मत एवं सुरक्षा निरीक्षण की जिम्मेदारी किस विभाग या अधिकारी की थी।
यदि समय पर आवश्यक रखरखाव नहीं किया गया, तो इसकी जाँच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित की जानी चाहिए। कर्मचारियों के आवासों के संधारण में हुई संभावित लापरवाही का भार कर्मचारियों पर डालना उचित नहीं होगा।
यदि मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड इन आवासों का नियमित संधारण करने में असमर्थ है, तो संबंधित विभागीय व्यवस्था एवं नियमों के अनुसार संधारण की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जाना चाहिए।
संघ की प्रमुख माँगें
मध्य प्रदेश संविदा एवं ठेका श्रमिक कर्मचारी संघ (इंटक) ने निम्नलिखित माँगें उठाई हैं—
1. महलगाँव स्थित कर्मचारी आवासों को खाली कराने एवं गिराने की प्रस्तावित कार्रवाई पर स्वतंत्र तकनीकी जाँच पूरी होने तक रोक लगाई जाए।
2. प्रत्येक आवास का पृथक-पृथक स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराया जाए।
3. जाँच समिति में स्वतंत्र एवं योग्य सिविल इंजीनियरों तथा संरचनात्मक विशेषज्ञों को शामिल किया जाए।
4. आवासों के निर्माण, रखरखाव, मरम्मत एवं पूर्व निरीक्षण से संबंधित अभिलेखों की जाँच की जाए।
5. आवासों के नियमित संधारण में हुई संभावित लापरवाही की जाँच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
6. जाँच रिपोर्ट की प्रति संबंधित कर्मचारियों एवं उनके प्रतिनिधि संगठन को उपलब्ध कराई जाए।
7. जो आवास मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण से सुरक्षित बनाए जा सकते हैं, उनके संबंध में नियमानुसार मरम्मत का विकल्प अपनाया जाए।
8. यदि किसी आवास को तकनीकी आधार पर असुरक्षित पाया जाता है, तो प्रभावित कर्मचारियों एवं उनके परिवारों की सुरक्षा, वैकल्पिक आवास तथा पुनर्वास संबंधी उचित व्यवस्था पर विचार करने के बाद ही नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाए।
9. आवासों के संधारण की जिम्मेदारी संबंधित विद्युत कंपनी को हस्तांतरित करने की व्यवहार्यता एवं नियमों के अनुरूप आवश्यक निर्णय लिया जाए।
संघ की चेतावनी: कर्मचारियों के हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं
संघ के प्रदेश महामंत्री विद्याकांत मिश्रा ने कहा कि कर्मचारी आवास केवल भवन नहीं, बल्कि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों और उनके परिवारों के निवास एवं सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं। इस मामले में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी के बजा पारदर्शिता, तकनीकी निष्पक्षता और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए   उन्होंने कहा कि “संघ की स्पष्ट माँग है कि किसी भी कर्मचारी आवास को केवल एकतरफा विभागीय रिपोर्ट के आधार पर गिराने की कार्रवाई न की जाए। पहले स्वतंत्र तकनीकी जाँच हो, भवनों की वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए और संधारण में हुई

 

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