लाड़ली बहना योजना बंद करने की तैयारी? CM मोहन यादव के बयान के बाद चर्चा तेज
भोपाल. रवींद्र भवन में बुंदेली समागम हुआ, एक कंटेंट क्रिएटर ने मुख्यमंत्री मोहन याद से लाडली बहना योजना को लेकर सवाल पूछा। जवाब में मुख्यमंत्री ने हल्के अंदाज में कहा कि लाडली बहना ही बहुत महंगी पड गई। मुझे क्या पता था कि मुख्यमंत्री बनते ही इतनी भारी मार पडती है।
सीएम ने कहा कि योजना महंगी पड गई
आंकडों में देखें तो यह राज्य की सबसे महंगी योजनाओं में से एक है। फिलहाल 1.25 करोड से ज्यादा महिलाओं को हर महीने 1500 मिलते है। 13 सितंबर 2026 की 40वीं किस्त में 1 करोड 25 लाख 10 हजिार 150 महिलाओं के खातों में 1835 करोड से ज्यादा गए। मौजूदा दर पर यह सालाना करीब 22000 करोड बैठता है। 41वीं किस्त अक्टूबर यानी इसी महीने में आने वाली है राशि अब भी 1500 ही तय है। जून 2023 से सितंबर 2026 तक 40 किस्तों में महिलाओं के खातों में कुल 65396 करोड जा चुके है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 23883 करोड रखे गए है राज्य के कुल बजट 4.38 लाख करोड का करीब 5.4 प्रतिशत। घोषणा के वक्त अनुमान इससे आधा था- फरवरी 2023 में शुरूआती गणना में सालाना खर्च करीब 12000 करोड आंका गया था तब राशि 1000 थी।
सरकार ने सामाजिक-आर्थिक अध्ययन कराने की बात कहीं
योजना शुरू होने के करीब साढे 3 साल बाद अगस्त 2026 में सरकार ने इसका सामाजिक-आर्थिक अध्ययन कराने की बात कहीं है। यह अध्ययन अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन संस्थान यान एआईजीजीपीए करेगा। जानकारी के अनसार बैग, भारिया और सहरिया जैसी विशेष पिछडी जनजातियों की महिलाएं लाडली बहना में शामिल नहीं है। उनके लिए अलग आहार अनुदान योजना है जिसमें 1500 महीने दिए जाते हैं। विभाग के अनुसार बजट की कमी के कारण दो महीने से भुगतान नहीं हुआ है।
