विश्व धरोहर की ओर मितावली, पड़ावली, बटेश्वर और ककनमठ यूनेस्को सूची से अस्थाई की बारी

ग्वालियर. चंबल की सदियों पुरानी मंदिर स्थापत्य कला को वैश्विक पहचान की दिशा एक बड़ा कदम, पर्यटन और राजगार के अवसर बढ़ने का अनुमान है। धार की बाघ गुफा, चित्रकारी और विदिशा की उदयगिरी गुफायें भी सूची में शामिल किये गये है। चम्बली के बीहड़ों केबीच सदियों से सड़ी स्थापत्य कला अब दुनिया में पहचान बनाने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ा है। मुरैना के बटेश्वर, पडावली और ककनमठ मंदिर समूह को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की विश्व धरोहर की अस्थाई सूची में शामिल कियागया है। इससे पहले वर्ष 2024 में ग्वालियर किला और चम्बल घाटी के शैलचित्र भी सूची में जगह चुक है। अब पर्यटन एवं संस्कृति विभाग इन्हें विश्व धराहर की स्थाई सूची में जगह दिलाने की तैयारी कर रहा है।
केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र शेखावत ने भी इसकी जानकारी शेयर की है। इस बार मध्यप्रदेश के चम्बल के मंदिर समूह के साथ धार की बाघ गुफा चित्रकारी, सीहोर का गिन्नौरगढ़ किला और विदिशा की उदयगिरी गुफायें भी अस्थाई सूची में जगह बना पायी है। विभाग के मुताबिक देश में ऐसी 7़6 धरोहरें है।
3 धरोहरों की खासियत
बटेश्वर
छठी से नौवीं सदी के बीच के मंदिरों का समूह। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इनके पुनर्निर्माण और संरक्षण का काम किया है।
पड़ावली
10वीं सदी का देवालय, जिसे बाद में गोहद के जाट शासकों ने गढ़ी का स्वरूप दिया। बारीक नक्काशी इसकी पहचान है।
ककनमठ
11वीं सदी का शिव मंदिर। भग्नावस्था में भी मूर्तिशिल्प संजोए है। इसका शिखर करीब 100 फीट ऊंचा है।
अस्थायी सूची में शामिल होने से यह होगा लाभ
दुनिया भर से पर्यटक आएंगे। इससे आर्थिक विकास होगा।
पर्यटन के अवसर बढ़ेंगे और यात्रा में बढ़ोत्तरी होगी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्वालियर-चंबल को खास पहचान मिलेगी।
युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
बटेश्वर-पढ़ावली और ककनमठ हेरिटेज साइट की सुरक्षा भी बढ़ेगी।
अब स्थायी सूची के लिए प्रयास-पीएस
नई धरोहरों का चयन प्रदेश के जीवंत इतिहास और पुरातत्व का प्रमाण है। पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने के साथ ओरछा, सतपुड़ा और मांडू सहित अन्य स्थलों को स्थायी सूची में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। शिवशेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव संस्कृति
अस्थायी सूची में शामिल होना बड़ी उपलिब्ध
अस्थायी सूची में शामिल होना विश्व धरोहर की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसके बाद नामांकन और मूल्यांकन की प्रक्रिया होगी फिर स्थायी दर्जा मिलेगा। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय पहचान, पर्यटन, संरक्षण और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। पद्मश्री केके मोहम्मद, एएसआई के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक
