कावेरी इंजन का रूस में सफल हुई ट्रायल, अमेरिका को लगा 48.5 किलोन्यूटन थ्रस्ट का झटका

DRDO Ghatak
नई दिल्ली. भारत के स्वदेशी कावेरी ड्राई इंजन ने रूस में कठिन हाई-एल्टीट्यूड और फ्लाइट ट्राइल्स कामयाबीपूर्वक पूरे कर लिये है। यह इंजन 48.5 किलो न्यूटन थ्रस्ट पैदा करने में सफल रहा। जबकि उसका लक्ष्य 46 किलो न्यूटन था। यह उपलब्धि अहम इसलिये है क्योंकि, यह इंजन भारत के आगामी डीआरडीओ घातक स्टील्थ ड्रोन का मुख्य पॉवर सोर्स बनेगा। इंजन गैस टरबाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (जीटीआरई) द्वारा विकसित किया गया है। अब इसे अंतिम एयरवर्थिनेस सर्टिफिकेशन के लिये सेमिलैक यानी सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थिनेस एंड सर्टिफिकेशन की मंजूरी मिलने का इंतजार है। मंजूरी मिलने के बाद इसका उत्पादन हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड संभालेगा।
कॉवरी ड्राई इंजन को में कठारे परिस्थितियों में परखा गया है। हाई-एल्टीट्यूड ट्रायलस में इंजन ने ऊंचाई वाले इलाकों में अपना प्रदर्शन साबित किया है। फ्लाइट ट्रायल्स में भी यह स्थित और प्रभावी रहा है। लक्ष्य से अधिक थ्रस्ट हासिल करना दर्शाता है कि इंजन की डिजाइन और इंजीनियरिंग मजबूत और सफल है। ड्राई वर्जन का मतलब है कि इसमें आफ्टरबर्नर नहीं है। जो ड्रोन जैसे प्लेटफॉर्म के लिये उपयुक्त होता है क्योंकि वहां लम्बे समय तक स्थिर और किफायती थ्रस्ट की जरूरत होती है। लम्बे वक्त से कावेरी कार्यक्रम चुनौतियों से जूझ रहा था। लेकिन ड्राईवर्जन की यह उपलब्धि प्रोजेक्ट को नयी दिशा दे रही है।
घातक स्टील्थ ड्रोन के लिये क्यों आवश्यक है
डीआरडीओ का घातक यूसीएवी भारत का अहम स्टील्थ ड्रोन कार्यक्रम है। यह बिना पायलट वाला लड़ाकू फायटर प्लेन दुश्मन के इलाके में घुसकर मिशन पूरा कर सकेगा। ऐसे ड्रोन के लिये विश्वसनीय और स्वदेश इजन होना बेहद आवश्यक है। इम्पोर्टेड इजन पर निर्भरता रणनीतिक जोखिम पैदा करती है। कावेरी ड्राई इजन के सफल परीक्षण से घातक को स्वदेशी पावरप्लाट मिलने का रास्ता साफ हो रहा है सेमिलैक की मंजूरी मिलने के बाद इजन को ड्रोन में एकीकृत किया जा सकेगा। इससे न सिर्फ घातक कार्यक्रम तेज होगा। बल्कि भविष्य के अन्य यूएवी और यूसीएवी परियोजनाओं के लिये भी आधार तैयार किया जायेगा।
रूसी परीक्षण सुविधाओं का इस्तेमाल कर भारत ने अपने इंजन को विश्वस्तरीय मानकों पर परखा है। अब घरेलू प्रमाणन और उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करना होगा । कुल मिलाकर यह विकास आत्मनिर्भर भारत अभियान को रक्षा क्षेत्र में मजबूती प्रदान करता है और भविष्य के स्टील्थ प्लेटफॉर्म के लिए मजबूत नींव रखता है।
सेमिलैक सर्टिफिकेशन अंतिम महत्वपूर्ण चरण है. इसके बाद एचएएल उत्पादन की जिम्मेदारी लेगा ।  इससे बड़े पैमाने पर निर्माण संभव होगा। कावेरी ड्राई इंजन की सफलता भारत की रक्षा अनुसंधान क्षमता को मजबूत करती है। यह दिखाता है कि निरंतर प्रयास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जटिल तकनीकों में महारत हासिल की जा सकती है।

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