ग्वालियर में न्यायिक शिक्षा के क्षितिज का विस्तार पर वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस

राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर में 26-27 सितंबर 2026 को “न्यायिक शिक्षा के क्षितिज का विस्तार” विषय पर वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्तिगण तथा मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के न्यायमूर्तिगण शामिल हुए।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा कि न्यायिक शिक्षा का वास्तविक दायरा किसी पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायाधीशों की समझ की सीमा तक इसका विस्तार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ज्ञान के साथ उसकी समझ भी आवश्यक है और न्यायिक शिक्षा का दायरा निरंतर बढ़ते रहना चाहिए।

उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह ने कहा कि न्यायिक अकादमियां न्यायपालिका के मानव संसाधन में निरंतर ज्ञान का संचार करने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। उन्होंने न्यायिक शिक्षा के तीन प्रमुख आयामों—ज्ञान, संवेदनशीलता और शिक्षार्थी—के निरंतर विस्तार पर जोर दिया।

न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने न्यायाधीशों की न्यायिक सोच को निरंतर बेहतर बनाने और उनके दृष्टिकोण के विस्तार की आवश्यकता बताई। वहीं न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने कहा कि आधुनिक न्यायिक शिक्षा केवल न्यायिक नजीरों की दक्षता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विधियों के निर्वचन की त्वरित योग्यता भी शामिल है। उन्होंने न्यायाधीशों के प्रशिक्षण में यांत्रिक प्रशिक्षण से बहुविषयक प्रशिक्षण की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के निदेशक एवं उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस ने बताया कि पिछले 24 वर्षों में अकादमी लगभग 52 हजार न्यायाधीशों के साथ संवाद कर चुकी है। उन्होंने DNA रिपोर्ट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख जैसे आधुनिक एवं विशेष विषयों पर न्यायाधीशों के लिए उन्मुखीकरण सत्र आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर भी सुझाव दिए।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे ने कहा कि विधि के क्षेत्र में कौशल स्वतः विकसित नहीं होता, बल्कि उसे निरंतर प्रशिक्षण एवं अभ्यास के माध्यम से विकसित करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि न्यायिक अकादमी उच्च मानक की न्यायिक शिक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रशिक्षण का उद्देश्य न्यायाधीशों में दूरदर्शी दृष्टि का निर्माण करना है।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एवं मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने भी सम्मेलन के महत्व को रेखांकित करते हुए महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

सम्मेलन में सूचना प्रौद्योगिकी के न्यायदान की प्रक्रिया में उपयोग पर विशेष रूप से जोर दिया गया। वक्ताओं ने बदलती तकनीक, आधुनिक विधिक चुनौतियों और न्यायिक कार्यप्रणाली में तकनीकी दक्षता के महत्व पर विचार साझा किए।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों के न्यायाधीशों के लिए प्रशिक्षण, संवाद एवं अन्य शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करती है। प्रेस-नोट के अनुसार, ग्वालियर में इस स्तर का कार्यक्रम पहली बार आयोजित किया गया, जिससे मध्यप्रदेश सहित पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों की न्यायपालिका के न्यायाधीशों के ज्ञान एवं कौशल के उन्नयन में मदद मिलेगी।

उद्घाटन समारोह में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायाधिपति न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, न्यायमूर्ति आनंद पाठक, न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल, ग्वालियर खंडपीठ के प्रशासनिक न्यायाधिपति न्यायमूर्ति जी.एस. आहलूवालिया, उच्च न्यायालयों के अन्य न्यायमूर्तिगण, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह, मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक उमेश पांडव, जिला न्यायालयों के न्यायाधीशगण, अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी, अतिरिक्त महाधिवक्तागण, डिप्टी सॉलीसीटर जनरल, वरिष्ठ अधिवक्तागण तथा प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *