200 करोड़ के बांड जुटाने में ग्वालियर नगर निगम के छूट रहे पसीना

ग्वालियर. नगर निगम की वित्तीय स्थिति सुधारने और अमृत योजना 2.0 के अंतर्गत अपने 350 करोड रुपये के अंशदान देने के लिए नगर निगम द्वारा 200 करोड रुपये के बांड जुटाने की प्रक्रिया में पसीना छूट रहा है। इसका कारण है कि बांड जारी करने से पहले भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड से अनुमति लेनी होगी लेकिन निगम की बैलेंस शीट के आंकडे गवाही दे रहे है कि ये रूपया वापस करने में चुनौतियों का सामना करना पडेगा। वर्तमान आंकडों के लिहाज से सेबी से अनुमति मिलना बहुत मुश्किल साबित होगा।
एमआईसी से ली मंजूरी
हालांकि नगर निगम ने ग्रीन बांड जुटाने के लिए मेयर इन काउंसिल से मंजूरी ले ली है और परिषद को स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। वहां से अनुमति मिलने के बाद इसे शासन को भी भेजा जाएगा और उसके बाद सेबी में आवेदन करना होगा लेकिन उससे पहले योजना तैयार करना निगम अधिकारियों के लिए टेढी खी साबित हो रहा है। इसका कारण है कि सेबी अनुमति देने से पहले निवेशकों के रुपये वापस करने का पूरा प्लान पूछेगा।
इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि सालभर में नगर निगम द्वारा सभी प्रकार के टैक्स और वसूली के रूप में कितनी राशि जुटाई जाती है। ऐसे में ये 200 करोड रुपये की राशि कैसे खर्च की जाएगी और बांड लेने वालों को किस प्रकार से निगम द्वारा रुपया वापस किया जाएगा इसकी पूरी प्लानिंग निगम के वित्त विभाग को करनी होगी।

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