आजादी के सूरज की पहचान देख लो, बच्चों के चेहरों पर है मुस्कान देख लो- ज्योति दोहरे

ग्वालियर, वीर रसों में अपने शबद पिरोकर लिखने वाली श्रीमति ज्योति दोहरे ने भारत 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके देश जवानों अपने प्राण न्यौछावर कर दिये उन्हीं का समर्पित लाइने लिखकर कर वीर रस ओतप्रोत कविता को गढ़ा है।
आजादी के सूरज की पहचान देख लो, बच्चों के चेहरों पर है मुस्कान देख लो।
आजादी का जश्न मनाते धूमधाम स, सूट बूट में घूम रहे इंसान देख लो
जिस्म तिरंगे में लिपटा है हर शहीद का, जान लुटाने वालों के बलिदान देख लो
सरहद पर भी दे गए पैगाम जीस्त का, उनका अरमां देख लो ईमान देख लो
मेहंदी कंगन चूड़ियां खामोश है बहुत, दुल्हनों के मरे हुए अरमान देख लो
रोता है मां का जिगर जलते हैं लाडले, वो चिताओं से भरे शमशान देख लो
वीरों की कुर्बानियों के खिल उठे चमन, बंजर पड़े हुए मगर खलियान देख लो
हम तमन्ना सरफ़रोशी की लिए हुए, आ डटे हैं जंग के मैदान, देखलो ।।

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