MP में यूपी और राजस्थान से ज्यादा नापतौल शुल्क वसूलने की तैयारी, देश एक फीस अलग-अलग

ग्वालियर. सरकार द्वारा ‘एमपी विधिक माप विज्ञान नियम-2011’ में संशोधन के लिए जारी मसौदे ने प्रदेश के नापतौल उपकरण कारोबारियों, पेट्रोल पंप संचालकों और कांटा सुधारकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। मसौदे में बिना पंजीयन कारोबार करने, अमानक बाट – तराजू रखने और कम तौलने पर एक लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रस्ताव किया गया है। उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के नजरिए से भले ही इन प्रावधानों का स्वागत हो रहा है, लेकिन पंजीयन शुल्क में प्रस्तावित भारी बढ़ोतरी को लेकर व्यापारिक संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
सरकार के मसौदे के अनुसार, नापतौल उपकरण बनाने वाले निर्माताओं के लिए पंजीयन शुल्क 1.50 लाख रुपए, डीलरों के लिए 1 लाख और रिपेयरर (कांटा सुधारक) के लिए 50 हजार रुपए प्रस्तावित हैं। प्रदेश में करीब पांच हजार से अधिक नापतौल उपकरणों से जुड़े कारोबारी इस प्रस्ताव से प्रभावित होंगे। सरकार ने अधिसूचना को अंतिम रूप देने से पहले 30 दिनों के भीतर आमजन और संबंधित पक्षों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की हैं। व्यापारी संगठनों ने इस पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
पड़ोसी राज्यों की तुलना में सबसे महंगा
पड़ोसी राज्यों से एमपी का प्रस्ताव सबसे महंगा दिखाई देता है। उत्तर प्रदेश में निर्माता के लाइसेंस के लिए सिर्फ 7500 रुपए निर्धारित हैं, जबकि राजस्थान में 25 हजार और छत्तीसगढ़ में 20 हजार रुपए हैं। वहीं, मध्य प्रदेश में निर्माताओं के लिए 1.50 लाख रुपए प्रस्तावित हैं। फीस में अंतर अन्य राज्यों की तुलना में कहीं अधिक है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि, इतनी अधिक फीस छोटे उद्यमियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों के लिए बड़ा आर्थिक बोझ साबित होगी। उनका तर्क है कि, उपभोक्ता संरक्षण जरूरी है, लेकिन शुल्क निर्धारण भी व्यावहारिक होना चाहिए।
व्यापारी बोले- नए उद्यमी होंगे प्रभावित
नापतौल उपकरण व्यापारी समिति के अध्यक्ष हरीश शर्मा, सचिव प्रमोद जैन और सह – सचिव सत्येंद्र सचान का कहना है कि, इससे नए उद्यमियों के कदम रुकेंगे और छोटे कारोबारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा। व्यापारियों ने कहा कि, जिस कारोबार को दूसरे राज्यों में कुछ हजार रुपए में वैधता मिल जाती है, उसी के लिए मध्य प्रदेश में लाखों रुपए का इंतजाम करना पड़ेगा। इसके लिए उन्होंने प्रमुख सचिव को आपत्ति दर्ज कराई है।
2011 के बाद से कोई बदलाव नहीं हुआ
मध्य प्रदेश नापतौल विभाग के नियंत्रक ब्रजेश सक्सेना का कहना है कि, सरकार ने मध्य प्रदेश विधिक माप विज्ञान नियम – 2011 में संशोधन का मसौदा जारी किया था। इसे अंतिम रूप से लागू होने से पहले दावे – आपत्ति आ रहे हैं, उनपर विचार किया जाएगा। वैसे 2011 के बाद से इसमें अभी तक कोई बदलाव नहीं किया गया है और नए नियमों के बाद रिन्युअल भी नहीं कराना पड़ेगा। एक बार पंजीयन में ही काम चल जाएगा।

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