73वें गणतंत्र दिवस केन्द्रीय जेल से 22 कैदी रिहा, बाहर आते ही नम हुई आंखें, गले लगते ही छलक आये आंसू

ग्वालियर. 79वें गणतंत्र दिवस पर बुधवार की सुबह सेन्ट्रल जेल के बाहर का दृश्य किसी को भी रूला सकता था। जेल से 22 बंदियों को आजाद किया गया था। 18 से 19 वर्ष जेल में सजा काटने के बाद जब यह कैदी बाहर आये तो उनको लेने के लिये किसी का बेटा तो किसी की पत्नी और किसी का नाती -पोते लेने के लिये आये थे।
जब यह कैदी जेल से बाहर आये तो बच्चे छोटे आज बच्चों की गोद में उनके बच्चे उन्हें घर ले जाने के लिये आये थे। यह वल पल था जब कैदियों और उनके परिजन की आंखें आंसुओं से भर आड़ी वहां मौजूद पुलिस अधिकारी भी अपनी आंसू नहीं रोक पाये। इस अवसर पर कैदियों को कहना था कि पूरी जिन्दगी उन्होंने एक गलती के लिये खराब कर दी। अब यह उनकी दूसरी जिन्दगी है और इसे मानवता के विकास के लिये लगायेंगे।

यह हुए आजाद
गणतंत्र दिवस पर बनवारी पुत्र फौजदार, मल्लाह उर्फ मन्ना उर्फ नन्द किशोर पुत्र मुन्ना, हल्के उर्फ नरेन्द्र पुत्र रघुवीर, धर्मसिंह पुत्र पुरुषोत्तम, बाबू पुत्र बहोरी, प्रेमनारायण पुत्र जगन्नाथ, राजू पुत्र दीनदयाल, भगवानसिंह पुत्र मंटेराम, मोहनलाल पुत्र चुन्नीलाल, राजेश उर्फ महाकाल पुत्र बाबूलाल, कल्लू खान पुत्र बन्ने खान, शिवचरन पुत्र भरोसा, मथुरा पुत्र मोती, होरम पुत्र रघुनाथ, रामहेत पुत्र श्रीराम, पूरन पुत्र अमरसिंह, बृजमोहन पुत्र श्रीलाल, बृजलाल पुत्र किशनलाल, डब्बू उर्फ राजेश पुत्र लखनलाल, शिवचरन पुत्र गोरेलाल, राजकुमार पुत्र मौजीलाल और कालीचरण पुत्र बाबूराम को रिहा किया गया।

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