महंगाई भत्ते व महंगाई राहत में कोई कटौती नहीं, 17 प्रतिशत की दर से जारी रहेगा भुगतान

नई दिल्ली. कोरोना वायरस और लॉकडाउन के बीच केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में कटौती को लेकर विवाद की स्थिति खड़ी हो गई है। सरकार ने ये भत्ते रोके तो कांग्रेस ने विरोध किया। खुद मनमोहन सिंह आगे आए और कहा कि सरकारी कर्मचारियों पर ऐसी सख्ती की जरूरत नहीं वहीं प्रियंका गांधी ने भी सवाल उठाए। अब सत्तारूढ़ भाजपा ने सफाई दी और पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा गया है कि महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में कोई कटौती नहीं की गई है। जनवरी 2020 से लागू बढ़ोतरी के अनुसार भुगतान होगा वहीं कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा गया कि कांग्रेस सरकारों ने तो अनिवार्य जमा योजना के तहत सभी की आय का 3-18 प्रतिशत हिस्सा, 3-5 साल तक लॉक-इन अवधि में रखना जरूरी किया था।
महंगाई भत्ते पर भाजपा की सफाई
महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में कोई कटौती नहीं की गई है और इसकी अतिरिक्त बढ़ोतरी की किस्तों पर अस्थायी रोक लगाई गई है जिसे बाद में फिर से लागू कर दिया जाएगा। मोदी सरकार द्वारा निर्धारित 17 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ते और महंगाई राहत का भुगतान जारी रहेगा। जैसे ही सरकार द्वारा 1 जुलाई 2021 से महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की भावी किस्तों को जारी करने का निर्णय लिया जाएगा 1 जनवरी 2020, 1 जुलाई 2020 और 1 जनवरी 2021 को प्रभावी संचयी संशोधन दर में शामिल कर लिया जाएगा। इस फैसले से होने वाली बचत राशि का उपयोग कोरोना महामारी से लड़ने के लिए किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
इस बीच महंगाई भत्ते और महंगाई राहत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सर्वोच्च अदालत से मांग की है कि वह सरकार को यह राशि जारी करने का आदेश दे। केंद्र सरकार का इस आदेश के बाद मध्य प्रदेश और उप्र समेत अन्य राज्य भी सरकार कर्मचारियों के भत्ते रोक चुके है।

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