जम्मू कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को लगातार तीसरी बार मिली धमकी

जम्मू कश्मीर. कश्मीरी पंडितों को ये धमकी लगातार तीसरी बार मिली है। 7 अगस्त से लेकर 1 सितंबर तक उन्हें 3 धमकी भरे लेटर मिले हैं। इनमें सिर्फ कश्मीरी पंडितों के नाम ही नहीं, घर का पता, गाड़ी का नंबर और रंग तक सब लिखा है। निजी जानकारी लीक होने के बाद कश्मीरी पंडित और डर गए हैं। वे जांच और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। टेलीग्राम चैनल के जरिए ये लेटर यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल ने भेजा था, जिसे खुफिया एजेंसियां आतंकी संगठन लश्कर का मुखौटा संगठन मानती हैं। वे आतंकियों की प्रॉपर्टी जब्त किए जाने से नाराज हैं। यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल ने सरकारी विभागों और कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाने का दावा किया है। इसके बाद सरकार ने कश्मीरी पंडितों को वर्क फ्रॉम होम करने के निर्देश दिए हैं।

अगस्त को कश्मीरी पंडितों और कश्मीर में काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों को धमकी भरा लेटर मिला।
लेटर यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल ने भेजा
40 साल के साहिल रैना (बदला हुआ नाम) कश्मीरी पंडित हैं। वे अनंतनाग में रहते हैं और रेवेन्यू डिपार्टमेंट में काम करते हैं। साहिल कहते हैं, ‘सोशल मीडिया पर नाम के साथ ऐसी धमकियां देखकर डर लगता है। 90 के दशक में भी हमारे परिवार ने ऐसा ही दौर देखा था और हमें कश्मीर छोड़ना पड़ा था। अब हम सब फिर डरे हुए हैं। हम नहीं चाहते कि इतिहास दोहराया जाए। लेटर सोशल मीडिया पर किसने डाला, हमारी निजी जानकारी इनके पास कैसे पहुंच रही। सुरक्षा एजेंसियां इस बात का पता लगाएं। अगर लेटर फर्जी हैं, तो वो भी पता चले और अगर असली हैं, तो इनके पीछे कौन है, उसकी पहचान हो। क्या इन्हें पाकिस्तान से कंट्रोल किया जा रहा है, या कोई और है।

अगस्त को ULC ने धमकी भरा दूसरा लेटर भेजा, जिसमें कश्मीरी पंडितों का नाम, घर का पता, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर और उसका रंग तक लिखा था।
हम सरकार पर भरोसा करके लौटे थे
साहिल के मुताबिक, सरकार कश्मीरी पंडितों को घाटी में दोबारा बसाने की बात करती है, लेकिन पीएम पैकेज के करीब 6 हजार कर्मचारी ही अब तक नहीं बस सके हैं। सरकार घाटी में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए 3 हजार मकान देने का दावा कर रही है, लेकिन कई परिवारों को वो भी नहीं मिला। साहिल गृह मंत्री से घाटी का दौरा कर कर्मचारियों और उनके परिवारों से मिलने की मांग करते हैं। वे कहते हैं, हम सरकार पर भरोसा करके लौटे थे। घर छूटे 37 साल हो गए, अब पुनर्वास की प्रक्रिया तेज हो।

 

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