मिहिर भोज की प्रतिमास्थल पर तनाव, पुलिस ने 8 आश्रुगैस के गोले दागे, साहबसिंह गुर्जर सहित 7 लोग गिरफ्तार

ग्वालियर. शनिवार की रात 9 बजे चिरवाई नाके स्थित गुर्जर मिहिर भोज जाति विवाद फिर से गरमा गया। शनिवार की रात लगभग 10 बजे जिला प्रशासन की मौजूदगी में पुलिस ने गुर्जर समाज के नेता साहब सिंह गुर्जर सहित 7 लोगों को गिरफ्तार कर लिया और बाकी लोगों पर पुलिस ने 8 आश्रुगैस के गोले दागे बदले में गुर्जर समाज के लड़कों ने भी पथराव किया है। जब इस घटना का पता गुर्जर समाज के लोगों चला तो उन्होंने सिकरोदा चौराहा पर जाम लगा दिया। मौके पर एएसपी हितिका वासल, सत्येन्द्रसिंह तोमर, राजेश दण्डोतिया, सीएसपी आत्माराम शर्मा टीआई कंपू रामनरेश यादव जिला प्रशासन की ओर से सीईओ जिला पंचायत आशीष तिवारी, एडीएम रिकेंश वैश्य, एसडीएम अनिल बनवारिया, तहसीलदार शिवानी पांडेय, पटवारी केके वर्मा आदि लोग मौजूद रहें। पूरी रात पुलिस बल तैनात रहेगा इसके लियेव्यवस्था कर दी गयी है। इसके लिये चारो कैमरे भी लगा दिये गये है।

स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। 8 बजे मिहिर भोज की शिला पट्टिका को ढका था
रात 8 बजे मिहिर भोज की शिला पट्टिका को ढक दिया गया था जैसे गुर्जर समाज के लोगों को पता चला तो उन्होंने लगी लोहे की चादर को तोड़ दी और बल्लियों को तोड़ दिया गया। जब इस बात का पता संभागायुक्त लगा तो उन्होंने सख्ती से कार्यवाही करने के लिये कहा। आपको बता दें कि मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने सम्राट मिहिर भोज की जाति विवाद मामले में कमिश्नर की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने शनिवार को कहा है कि शिला पट्टिका विवाद की वजह बना है। इसलिये कमेटी की रिपोर्ट आने तक शिला पट्टिका को ढक कर रखा जाये। मिहिर भोज की वीरता और उनके कार्यो से प्रेरणा लेने के लिये मूर्ति को खुला रखें। हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि दोनों समाज के लोगों से संयम बरतने की उम्मीद की जाती है। जिला प्रशासन भी सार्वजनिक स्थान पर कानून व्यवस्था बनाये रखं। मामले में अगली सुनवाई अब 20 अक्टूबर की जायेगी।

कोर्ट के आदेश के मेन पॉइंट्स

कमेटी में संभागायुक्त और पुलिस महानिरीक्षक को शामिल किया जाए। संभागायुक्त कमेटी के अध्यक्ष होंगे और आईजी उपाध्यक्ष। कमेटी में एक सदस्य गुर्जर समाज व एक क्षत्रिय समाज का सदस्य लिया जाए। फिर भी कोई विवाद होता है तो गुर्जर समाज का अधिवक्ता आरवीएस घुरैया व क्षत्रिय समाज का अधिवक्ता डीपी सिंह प्रतिनिधित्व करेंगे।

कमेटी ठोस सबूत व साहित्य के आधार पर ऐतिहासिकता का पता लगाएगी। साथ ही इस पर भी विचार करेगी कि सार्वजनिक स्थान पर राष्ट्रीय नायक की मूर्ति के सामने जाति प्रयोग किया जा सकता है। देश में लगी सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमाओं के संबंध में भी मार्गदर्शन लेगी। साथ ही समय पर सुप्रीम कोर्ट ने दिए संवैधानिक सिद्धांत व आदेशों पर भी विचार करेगी। बंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश की जाएगी।

कमेटी की रिपोर्ट आने तक शिला पट्टिका को ढंका जाए, जो दो समाजों को बीच विवाद का कारण बनी है। कोर्ट ने दोनों समाज के बुजुर्ग लोगों से उपेक्षा की है कि वह लोगों को समझाएं

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