ग्वालियर में सरकार का कारनामा, मृतकों को 1 महीने जिंदा रखा, अप्रैल-मई में हुई कोविड डेथ को जून में बता रहा प्रशासन
ग्वालियर. आमखो निवासी रामप्यारी बाई अपनी मौत के 33 दिन बाद जिंदा होकर दोबारा मर गईं। जी हां प्रशासन की 23 जून की हेल्थ बुलेटिन तो यही है। इस दिन जारी हेल्थ बुलेटिन में 3 नए संक्रमित और 2 की मौत दिखाई गई थी। इन दो मौत में से एक मौत आमखो निवासी रामप्यारी बाई की बताई गई थी जबकि 21 मई को उनकी मौत कोरोना से हो गई थी, उसी दिन अंतिम संस्कार हो गया था। यह कोई गलती नहीं बल्कि अप्रैल-मई में कोरोना से हुई मौतों को छिपाने का नतीजा है। अब इन मौतों को एक-एक करके जोड़ा जा रहा है।
ग्वालियर में कोविड मौत का गड़बड़झाला अभी भी जारी है। अप्रैल-मई में कोविड से हुई मौतों को अब प्रशासन ठिकाने लगा रहा है। यही कारण है कि बीते 12 दिन में कोविड से 13 मौत होना प्रशासन ने अपने हेल्थ बुलेटिन में दिखाया लेकिन इन 12 दिन में एक भी अंतिम संस्कार कोविड गाइडलाइन से शहर के किसी भी मुक्ति धाम में नहीं हुआ है। अब सवाल तो खड़ा होता है कि आखिरकार यह मौतें किसकी हो रही है।
जांच-पड़ताल में पता चला है कि यह अप्रैल-मई महीने की कोविड डेथ है जिनको प्रशासन अब दिखा रहा है। 22 जून को ग्वालियर के हेल्थ बुलेटिन में 1 मौत बताई गई थी। यह मौत असल में 19 मई को थाटीपुर निवासी युवक रामचंद की हुई थी जिसे डेथ ऑडिट के बाद अब कोविड डेथ बताया गया है।
अभी तो कोई सुपर स्पेशियलिटी से कोई शव नहीं मिल रहे
नगर निगम के उपायुक्त व कोविड डेथ वालों के प्रोटोकॉल से अंतिम संस्कार कराने के नोडल ऑफिसर अतिबल सिंह यादव का कहना है कि अभी सुपर स्पेशियलिटी से कोई शव नहीं मिल रहे है। कुछ दिन से प्रोटोकॉल से हमने कोई अंतिम संस्कार नहीं करवाए है।
