अवैध मदरसे में विदेशी कनेक्शन की जांच और अवैध मदरसा में मिली भड़काऊ अध्ययन सामग्री का ढेर


ग्वालियर. एजी ऑफिस बिल्डिंग परिसर में अवैध रूप से संचालित दारूल कुरआन मदरसे की जांच-पड़ताल में अब धार्मिक शिक्षा और दूसरे धर्मो के खिलाफ भड़काऊ अध्ययन सामग्री का एंगल की जा रही है। जिसको लेकर शनिवार को लगभग 8 घंटे (सुबह 8 से शाम 4 बजे तक) बालिका गृह, बालक गृह और शिशु गृह में पहुंची टीमों ने बच्चों से पूछताछ की। पूछताछ में बाल आयोग, बाल क्याण समिति, महिला एवं बाल विकास विभाग की टीमों ने बच्चों के यहां होने, उनको दी जाने वाली शिक्षा, उनको रखे जाने की प्रक्रिया व्यवस्था से जुड़े मामलों को शामिल किया है। शनिवार को कलेक्टर रूचिका चौहान, महिला बाल विकास की जिला कार्यक्रम अधिकारी उपासना राय भी जेएएच परिसर में स्थित बालिका गृह पहुंची और पूछताछ की।
गौरतलब है कि शिकायतों के बाद मप्र बाल आयोग ने शुक्रवार को सीडब्ल्यूसी एवं पुलिस के साथमिलकर मदरसे पर छापा मारा था। जिसमें अवैध रूप से रखे 26 बच्चे को निकाल कर सीडब्ल्यूसी के हवाले किया है। देर रात जिला प्रशासन ने मदरसा सील कर दिया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इंटेलीजेंस ने इस मामले में जांच दूसरे देशों से जोड़कर भी शुरू की है। इसकी जानकारी राज्य शासन के साथ केन्द्र सरकार को भेज दी गयी है। मदरसे में पढ़ाई की जा रही किताबों के साथ वीडियो सीडी भी बरामद की गयी है। जांच प्रक्रिया में बाल आयोग अध्यक्ष निवेदिता शर्मा, सीडब्ल्यूसी मेम्बर अंजू भदोरिया, रश्मि त्रिपाठी, संतोष शर्मा, मनीषा शर्मा भी शामिल रहे।
10×5 में ठूंस कर भरी थी 8 बच्चियां, 10×15 के कमरे में 18 बच्चे
न खेलने की जगह न सोने को पर्याप्त जगह, बच्चे बोले- हमें घर भेज दो, जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें, आंखों में सपने -कदमों के सामने खेलने के लिये खुला मैदान होना चाहिये। उस आयु में 26 मासूमों की दुनिया 2 छोटे कमरों में सिमटी मिली है। एजी ऑफिस के पास दारूल कुरआन मदरसे में 10×15 फीट के एक कमरे में 18 लड़के रह रहे थे। यानी प्रत्येक बच्चे के हिस्से में औसतन महज 8×3 वर्गफीट जगह, दूसरी ओर 10×15 फीट के कमरे में 8 बच्चियां थी। यहां तो एक बच्ची के हिस्से में सिर्फ 6.25 वर्गफीट जगह थी। इसी सीमित जगह में उनका रहना और सोना था।
4 दरवाजों के पीछे बुर्के में मिलीं बच्चियां…
मस्जिद के पीछे 4 दरवाजे पार करने पर बुर्के पहने बच्चियां मिलीं। कुछ बच्चों के शरीर पर चोट के निशान थे। दो बच्चियों ने मारपीट की शिकायत की। कमरों के बाहर गंदगी, रोटियों पर घूमते चूहे और बिना दरवाजों के शौचालय थे। निरीक्षण टीम ने बच्चों से बात की तो वे बोले- हमें घर भेज दो।
{इस्लाम आतंक? या आदर्श, {कल्कि अवतार और मुहम्मद साहब, {नसीमे हिदायत के झोंके, {हदीस और सुन्नत, {उर्दू और अरबी की अन्य किताबें, {मुंतखब अहादीस, {तारीख़-ए-इस्लाम, {क़ुरआन मजीद (रैक में ऐसी सैकड़ों किताबें हैं।)
मदरसे का पंजीयन नहीं, कब से चला रहे, याद नहीं-संचालक
दारुल कुरआन मदरसे के संचालक और जिला कोर्ट के वकील जाकिर खान से जब मदरसे की वैधता पर सवाल किए गए तो वे स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। मदरसा कब से चला रहे हैं? इस पर बोले- याद नहीं। मस्जिद किसकी जमीन पर बनी है? जवाब दिया- वक्फ बोर्ड की जमीन पर। मदरसा बिना पंजीयन कैसे चल रहा था? इस पर स्वीकार किया कि मदरसा बोर्ड से पंजीयन नहीं कराया है। हालांकि, एक सोसायटी से पंजीयन होने का दावा किया।

 

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