सिंधिया राजपरिवार की संपत्ति बंटवारे में प्रतिमा राणा का समझौते से इंकार, संपत्ति में से 10% हिस्सा चाहिये
ग्वालियर. सिंधिया राजघराने का संपत्ति समझौता अब हिस्सेदारी हड़पने के गंभीर आरोप में उलझ गया है। महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की नातिन प्रतिमा राणा ने जिला न्यायालय में पेश आवेदन में आरोप लगाया है कि दूसरे पक्षकार उनका हिस्सा हड़प रहे है। उनका दावा है कि संपत्ति में उन्हें 10 हिस्सा मिलना चाहिये। जबकि समझौते में इसका केवल एक अंश मिलने की आशंका है।
भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआ ऊषाराजे, वसुंधराराजे व अन्य ने पारिवारिक समझौते के आधार पर मुकदमे समाप्त करने के आवेदन जिला न्यायालय में पेश किया है। प्रतिमा राणा, ज्योतिरादित्य सिंधिया की सबसे बड़ी बुआ पद्माराजे की बड़ी बेटी और उनकी फुफेरी बहन हैं। पद्मा राजे महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की सबसे बड़ी पुत्री थी। उनका विवाह त्रिपुरा राजपरिवार में हुआ था। बीमारी के चलते कम उम्र में उनकी मृत्यु हो गयी थी।
आपत्तियों का निपटारा होने तक डिक्री जारी नहीं हो-प्रतिमा
प्रतिमा ने स्पष्ट किया है कि वह ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर करने पर विचार करने को तैयार हैं, जिसमें उन्हें अथवा उनके पारिवारिक समूह को 10% हिस्सा मिले। उनका आग्रह है कि आपत्तियों का निपटारा होने तक समझौते के आधार पर डिक्री जारी नहीं की जाए।
कोर्ट में प्रतिमा के आरोप
ऊषा राजे सिंधिया पर-प्रतिमा राणा का आरोप है कि हस्ताक्षर से पहले और बाद में बार-बार मांगने के बावजूद ऊषा राजे सिंधिया ने समझौते की प्रति उपलब्ध नहीं कराई।
होटल में हस्ताक्षर कराने पर-प्रतिमा के अनुसार, उन्हें 24 जून को नेपाल से दिल्ली बुलाया। अगले दिन ताज मानसिंह होटल में समझौता पढ़ने नहीं दिया, दबाव और गलत जानकारी देकर हस्ताक्षर कराए।
धोखाधड़ी का आरोप-प्रतिमा ने आवेदन में दावा किया कि समझौते की शर्तें छिपाकर हस्ताक्षर कराए गए। इसे भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 17 के तहत धोखाधड़ी बताते हुए समझौते पर सवाल उठाया है।
