CJP आंदोलन की फंडिंग विदेश से हो रही है, देश को नेपाल-बांग्लादेश बनाने की साजिश-हरीश साल्वे
नई दिल्ली. सीनियर एडवोकेट और भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने कहा है कि देश में चल रहे आन्दोलन की फंडिंग विदेशों से हो रही है। इसके पीछे विदेशी ताकतें है। उन्होंने कहा है कि भारत में बांग्लादेश -नेपाल जैसा वातावरण बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सीनियर एडवोकेट ने बाहरी शक्तियों की तरफ इशारा करते हुए कहा है कि बाहर के देश खास करके अमेरिका को देख लो बड़ा नाखुश है। इंडिया से और हमारे फायनेंस मिनिस्टर ने भी कह दिया है। सब फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स हो रहे हैं। कनाडा के साथ वार्ता आगे बढ़ रही है। अमेरिका के बारे में पूछा तो वित्त मंत्री ने सीधा कह दिया कि यह एक स्तर पर आकर यह अटक गयी है।
मोदी सरकार के लिये कई केस की पैरवी करने वाले हरीश साल्वे ने कहा है कि यह क्या कोई शक है कि नेपाल में गड़बड़ी किसने कराई? कोई शक है कि श्रीलंका में गड़बड़ किसने कराई? बांग्लादेश में किसने गड़बड़ कराई। शेख हसीना को हटाकर अपना प्राइम मिनिस्टर बनाया, किसने कराया यह सब? यह सब बाहर की ताकतें करवा रही हैं। यह उसी टाइप का सिचुएशन इंडिया में कराना चाह रहे हैं।
CJP नेताओं के बारे में हरीश साल्वे ने कहा कि ये दिपके जी कौन हैं, ये सौरव दास कौन हैं, एक यूट्यूबर हैं। ये सब कहां से आ गए, जर्मन नेशनल है. ये एकाएक बाहर के नेता बन गए. कहां से इतना पैसा मिल रहा है इनको. उन्होंने कहा कि पर्सनली उन्हें कोई शक नहीं है कि एक कोशिश की जा रही है, मोदी सरकार जो आज फोकस्ड है, ये परेशान है कि मोदी सरकार झुक नहीं रही है तो हटाओ इनको. ऐसे लोग लाओ जो हमारे दोस्त हैं। मुझे कोई शक नहीं है. बड़ा क्लियर पैटर्न दिख रहा है पिछले 6-8 महीने से. सरकार का दायित्व बनता है कि इससे डील करे।
हरीश साल्वे भारत के प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। वे 1999 से 2002 तक भारत के सॉलिसिटर जनरल रहे । पाकिस्तान में गलत तरीके से बंद पूर्व नेवी ऑफिसर कुलभूषण जाधव केस में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में भारत का पक्ष रखा हैं। वे वोडाफोन टैक्स विवाद जैसे कई बड़े मामलों में वे शामिल रहे. 2015 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया हैं।
