VISM कॉलेज में कै. राजमाता विजयाराजे सिंधिया की 107वीं जयंती श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई
ग्वालियर। VISM ग्रुप ऑफ स्टडीज के गुरूबख्श सिंह सभागार में कै. राजमाता विजयाराजे सिंधिया की 107वीं जयंती श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर संस्थान के चेयरमैन डॉ. सुनील सिंह राठौर, चेयरपर्सन सरोज राठौर, ग्रुप निदेशक डाॅ. प्रज्ञा सिंह, वरिष्ठ समाजसेवी मुकेश भदौरिया , समाजसेवी नीरू राजावत, आक्रिटेक्ट अवनीश भदौरिया सहित संस्थान के पदाधिकारियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने राजमाता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में उनके प्रेरणादायी जीवन, राष्ट्र के प्रति समर्पण, सामाजिक योगदान एवं जनसेवा के कार्यों को स्मरण किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुनील सिंह राठौर ने कहा कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी का जीवन केवल राजनीतिक एवं सामाजिक योगदान तक सीमित नहीं था, बल्कि शिक्षा के प्रति उनकी दूरदर्शी सोच भी उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा थी। उन्होंने बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने और महिलाओं को शिक्षित बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि राजमाता का मानना था कि शिक्षित महिला न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है। जब एक बालिका को शिक्षा के समान अवसर मिलते हैं, तो वह अपने सपनों को साकार करने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में भी सक्षम बनती है। आज जिस महिला सशक्तीकरण की बात की जाती है, उसके मूल में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। डॉ. राठौर ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए यह भी बताया कि राजमाता जी की शैक्षणिक सोच केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं थी। वह ऐसी शिक्षा की पक्षधर थीं, जिसमें भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्य, अनुशासन, आत्मविश्वास और अच्छे संस्कारों का समावेश हो। उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक योग्य, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक का निर्माण करना भी होना चाहिए।
