डसॉल्ट ने दी सहमति, राफेल फायटर जेट में लगेंगे भारतीय हथियार

राफेल फाइटर जेट में भारतीय हथियार लगाने से विदेशी हथियारों को खरीदने की जरुरत नहीं पड़ेगी. (Photo: Dassault Aviation)
नई दिल्ली. भारतीय वायुसेना के लिये मध्यम भूमिका वाले फायटर जेट कार्यक्रम में बड़ी प्रगति हुई है। फ्रांसीसी कम्पनी डसॉल्ट एविएशन ने राफेल जेट्स पर स्वदेशी भारतीय हथियारों और प्रणालियों के लगाने की सहमति दे दी है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक कम्पनी अस्त्र मार्क-1 और 2 बीवीआर मिसाइल, स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन, रूद्रम एंटी-रेडिएशन मिसाइल और डीआरडीओ विकसित हथियारों व इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट को राफेल प्लेटफॉर्म पर लगाने के लिये तैयार है। इससे पहले सोर्स कोड संबंधी चिंताओं की वजह से यह मांग अटक रही थी।
यह सहमति महंगे फ्रांसीसी हथियारों जैसे मीटियर और स्कैलप पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी। भारतीय वायुसेना को अपने हथियार सिस्टम उपयोग करने की आजादी मिलेगी। जिससे लागत घटेगी और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। प्रस्तावित 114 राफेल जेट्स का सौदा 2 लाख करोड़ रूपये से ज्यादा का अनुमानित है।
यह सौदा वर्तमान वित्तीय वर्ष के अंत यानी मार्च 2027 तक या 2026 के अंत तक पूरा होने की अनुमान है। चर्चा में कीमत 50-60 प्रतिशत मेक इन इंडिया सामग्री, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और भारत में एमआरओ सुविधा स्थापित करने पर विस्तार से बातचीत चल रही है।
भारतीय वायु सेना के स्क्वाड्रन की संख्या घटकर 29 रह गई है, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है।  मिग-21 पूरी तरह रिटायर हो चुके है।  ऐसे में एमआरएफए कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है।  ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल पर भारतीय हथियारों के इस्तेमाल के अनुभव और पेरिस से सरकारी स्तर पर दबाव ने डसॉल्ट को इस सहमति के लिए प्रेरित किया। यह समझौता न केवल सैन्य क्षमता बढ़ाएगा बल्कि घरेलू रक्षा उद्योग को भी मजबूत करेगा । कुल मिलाकर यह विकास भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और फ्रांस के साथ रणनीतिक साझेदारी दोनों को मजबूत संकेत देता है. सफल बातचीत से वायु सेना की लड़ाकू क्षमता में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *