यदुवंशी समाज द्वारा मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान में बोले -शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण भी जरूरी-सीबी प्रसाद
ग्वालियर। अखिल भारतीय यदुवंशी समाज द्वारा बाल भवन में मेधावी छात्र-छात्राओं के सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में करीब 60 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। सम्मानित विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह, प्रमाण-पत्र, दुपट्टा एवं मां लक्ष्मी जी का चित्र भेंट किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अपर कलेक्टर सीबी प्रसाद, विशेष अतिथि तहसीलदार मनीष जैन एवं आरआई होतम सिंह यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण भी जरूरी-सीबी प्रसाद
मुख्य अतिथि अपर कलेक्टर सीबी प्रसाद ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति को स्वयं कष्टमय जीवन का अनुभव करना चाहिए, तभी वह दूसरों के कष्टों को समझ सकता है। उन्होंने कहा कि मेधावी होने के साथ-साथ चरित्र निर्माण भी आवश्यक है। विद्यार्थियों को अपने माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए तथा उनका आशीर्वाद लेकर जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी मोबाइल में अधिक समय बिता रही है और आम जिंदगी से उसका जुड़ाव कम होता जा रहा है। बुजुर्गों के प्रति श्रद्धा और आदर का भाव बनाए रखना जरूरी है। विद्यार्थियों ने जो शिक्षा प्राप्त की है, उसका उपयोग देश को आगे बढ़ाने में करें, तभी उनकी शिक्षा और जीवन सार्थक होगा।
97% अंक लाने वाले बच्चों के माता-पिता की मेहनत को भी मिले श्रेय : मनीष जैन
विशेष अतिथि तहसीलदार मनीष जैन ने सम्मानित छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि विद्यार्थियों की सफलता के पीछे उनके माता-पिता की बड़ी भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि यदि कोई बच्चा 97 प्रतिशत अंक प्राप्त करता है तो इसके पीछे पिता की मेहनत भी शामिल है, जिसने अपने सपनों को किनारे रखकर बच्चे की स्कूल और कोचिंग की फीस का इंतजाम किया। वहीं मां ने रात-रात भर जागकर बच्चों के लिए भोजन, नाश्ता, कपड़े और स्कूल जाने की तैयारी में अपना समय समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि आज के समय में 97 प्रतिशत अंक आने के बाद भी कई माता-पिता बच्चों से और अधिक की अपेक्षा करते हैं, जबकि हमारे समय में ग्रेस अंकों से पास होने पर भी माता-पिता खुशी से लड्डू बांटते थे। उन्होंने कहा कि यह दौर किताबों से अधिक मोबाइल पर रील बनाने का हो गया है, ऐसे में विद्यार्थियों को पढ़ाई, संस्कार और अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए।
15 दिनों की मेहनत से तैयार हुआ आयोजन
सम्मान समारोह को सफल बनाने में होतम सिंह यादव और उनकी पत्नी सरिता यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार दोनों पिछले करीब 15 दिनों से कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे थे। उनकी मेहनत के चलते समारोह व्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ। समारोह में छात्र-छात्राओं को दिए जाने वाले स्मृति चिन्ह, प्रमाण-पत्र, दुपट्टे एवं मां लक्ष्मी जी की प्रतिमा को व्यवस्थित करने और उन्हें मुख्य अतिथि तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सरिता यादव ने संभाली। कार्यक्रम में समाज के पदाधिकारी, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
