शहर के प्रसिद्ध गणेश मंदिर, जमीन से निकले मोटे गणेश जी
ग्वालियर. भगवान गणेश के कई पुराने मंदिर है। इनसे जुड़ी मान्यतायें और गणेश प्रतिमाओं का अनोखा स्वरूप इन्हें खास बनाता है। एक मंदिर में भक्त अपनी मनोकामना कागज पर लिखकर भगवान के चरणों में अर्जी लगाते है। वहीं, दूसरे मंदिर के गणेश जी अपने बड़े पेट की वजह ‘‘मोटे गणेश’’ के नाम से प्रसिद्ध है। इन मंदिरों में स्थानीय लोगों के अलावा देश-विदेश से भी श्रद्धालु दर्शन के लिये आते हैं।
शिंदे की छावनी के पास रिद्धि-सिद्धि गणेश मंदिर है। इसे शहर में अर्जी वाले गणेश मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर लगभग 205-300 साल पुराना बताया जाता है। यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि भगवान गणेश के चरणों में च्ची श्रद्धा से अर्जी लगाने पर उनकी मनोकामनायें पूरी होती है।भक्त अपनी इच्छा या समस्या एक कागज पर लिखकर भगवान गणेश को चढ़ाते हैं। यह परंपरा इस मंदिर की सबसे बड़ी पहचान बन गई है।
श्रद्धालु यहां शादी, नौकरी, कारोबार, परिवार और दूसरी मनोकामनाओं से जुड़ी अर्जियां लेकर आते हैं। खासकर शादी की इच्छा रखने वाले भक्तों की संख्या ज्यादा होती है। मंदिर के पुजारी पंडित राजेंद्र शर्मा बताते हैं कि यहां भगवान गणेश की मूर्ति का स्वरूप बाकी गणेश प्रतिमाओं से अलग है। बप्पा रिद्धि-सिद्धि के साथ पद्मासन में बैठे हैं। उनके एक हाथ में वेद और दूसरे हाथ में वरमाला है। इस अनोखे स्वरूप के कारण भी यहां शादी से जुड़ी अर्जियां बड़ी संख्या में आती हैं। ग्वालियर के खासगी बाजार में श्री मोटे गणेश मंदिर भी करीब 300 साल पुराना है। स्थानीय लोग इसे ‘व्यापारियों के गणेश’ के नाम से भी जानते हैं। मान्यता है कि इलाके के कई व्यापारी अपनी दुकान या कारोबार शुरू करने से पहले यहां भगवान गणेश के दर्शन करते हैं। इसके बाद ही वे अपना काम शुरू करते हैं।
