चीनी ₹70 किलो पहुंची, 3 महीने में 40% महंगी

नई दिल्ली. कांग्रेस ने चीनी की बढती कीमतों और स्टॉक पर सरकार से पूछा कि ये कैसा आत्मनिर्भर भारत है जहां विदेश से चीनी आयात की जा रही है और दूसरी तरफ गन्ने को पेट्रोल में मिलाने के लिए एथेनॉल में झोंका जा रहा है। हालांकि केंद्र सरकार ने चीनी की बढती कीमतों के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। देश के कई शहरों में चीनी की कीमत 70 रुपए किलो तक पहुंच गई है। पिछले 3 महीने में इसके दाम करीब 40 प्रतिशत बढ गए है। कीमत कम करने के लिए केंद्र ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर बिना ड्यूटी के आयात करने की मंजूरी दी है।

देश के कई शहरों में चीनी की कीमत 70 रुपए किलो तक पहुंच गई है। - Dainik Bhaskar
गन्ने का बडा हिस्सा एथेनॉल बनाने में खपा
सरकार की नई एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी के तहत गन्ने का एक बडा हिस्सा चीनी की बजाय एथेनॉल बनाने में खप रहा है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के अनुसार देश में पिछले साल 720 करोड लीटर एथेनॉल बना। इसके लिए 1.33 करोड टन अनाज व 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा लगा। इसमें 34 लाख टन गन्ना था।
केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में 15 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी थी। फरवरी 2026 में 5 लाख टन की मंजूरी और बढा दी। सरकार ने कीमतें बढने पर मई 2026 में चीनी के एक्सपोर्ट पर रोक लगाई लेकिन तब तक 8 लाख टन चीनी देश से बाहर भेजी जा चुकी थी। इससे चीनी का स्टॉक 47 लाख टन से घटकर 39 लाख टन हो गया और घरेलू बाजार मे ंचीनी की कमी हो गई।

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