युवती की गुमशुदगी के मामले की जांच से ASP सुजावल जग्गा हटाया, हाईकोर्ट ने दिये आदेश देते हुए एसएसपी जांच की निगरानी करेंगे

ग्वालियर. लापता युवती और एक युवक को तलाशने के मामले में पुलिस की जांच पर नाराजगी जताते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बड़ा आदेश दिया है कि हाईकोर्ट ने जांच कर रहे एसआईटी प्रमुख और एएसपी सुजावल जग्गा को तुरंत जांच से हटा दिया है। अब इस मामले की जांच एसएसपी धर्मवीर सिंह स्वयं करेंगे और इसकी व्यक्तिगत निगरानी भी करेंगे।
सुनवाई के बीच हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि जिस पिता को उसकी गुमशुदा बेटी का कोई पता नहीं है पुलिस उसी पर बार-बार बेटी का ठिकाना बताने का दबाव बना रही है। हाईकोर्ट ने इसे पुलिस की गलत कार्यशैली बताते हुए कहा है कि इससे मध्यप्रदेश पुलिस की जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। हाईकोर्ट ने डीजीपी को भी पुलिस की कार्य-प्रणाली की समीक्षा करने की आवश्यकता बताई है।
पुलिस ईमेल के भरोसे बैठी रही
सुनवाई के बीच सरकारी पक्ष ने बताया है कि आधार कार्ड की लोकेशन से जुड़ी जानकारी के लिये नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) को ईमेल भेजा गया था। लेकिन जवाब नहीं मिलने की जांच आगे नहीं बढ़ सकी। इस पर हाईकोर्ट ने कहा है कि पुलिस 2 माह तक सिर्फ ईमेल के भरोसे बैठी रही और संबंधित कार्यालय जाकर जानकारी जुटाने का प्रयास तक नहीं किया है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि अब इस मामले में पेश होने वाली हर स्टेट्स रिपोर्ट एसएसपी के शपथ पत्र के साथ दाखिल की जायेगी। हाईकोर्ट ने अनुमान जताया है कि पुलिस केवल तकनीकी साधनों पर निर्भर रहने के बजाय मैदानी स्तर पर भी सक्रियता से तलाश करेगी।
मोबाइल लोकेशन तक सीमित रही जांच
कोर्ट ने कहा कि पुलिस की जांच केवल मोबाइल लोकेशन तक सीमित रही। अगर मोबाइल बंद हो जाए तो पूरी जांच रुक जाती है। इस तरह की जांच से गुमशुदा लोगों का पता लगाना मुश्किल है।
सुनवाई के दौरान ASP सुजावल जग्गा ने स्वीकार किया कि उन्हें पूरे मामले को समझने में करीब दो महीने लग गए। उन्होंने जांच जारी रखने के लिए कोर्ट से एक और मौका मांगा, लेकिन हाईकोर्ट ने यह मांग खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि सरकार बेटियों की सुरक्षा की बात करती है, लेकिन इस मामले में पुलिस की कार्रवाई बेहद धीमी और निराशाजनक रही।
मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई 2026 को होगी। तब तक एसएसपी की निगरानी में जांच आगे बढ़ेगी और उसकी प्रगति रिपोर्ट हाईकोर्ट के सामने पेश की जाएगी।
