एक IAS की सेवा समाप्त, 2 IAS ओर PCS सहित 12 पर गिरी गाज, 54 करोड़ की डील ने हिला दिया पूरी नौकरशाही को

देहरादून. उत्तराखंड की नौकरशाही में शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि एक जमीन खरीद के मामले में प्रशासनिक तंत्र की इतनी बड़ी परतें उधेड़ दी हों। एक आईएएस अफसर बर्खास्तगी की संस्तुति, 2 आईएएस और एक पीसीएस अफसर के खिलाफ कठोर कार्यवाही, कुल 12 अधिकारियों और कर्मचारियों पर निलंबन और मुकदमें की तलवार लटकी हैं।
लगभग 14 करोड़ रूपये कीमत बताई जा रही है। भूमि का 54 करोड़ रूपये में खरीदने के आरोपों से यह मामला शुरू हुआ था। सीएम पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने जिस सख्ती के साथ कार्यवाही की है। उसने सचिवालय से लेकर जिलों तक एक स्पष्ट संदेश पहुंचाया है। सरकारी धन से जुड़े मामलों में अभी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है।
कैसे खुलासा हुआ मामले का
अप्रैल 2025 में हरिद्वार नगर निगम द्वारा की गयी एक भूमि खरीद अचानक सुर्खियों में आ गया। आरोप लगा है कि जिस जमीन की वास्तविक कीमत करीब 14 करोड़ रूपये के आसपास थी। उसे लगभग 54 करोड़ रूपये में खरीद लिया गया। प्रकरण सामने आते ही राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक हलकों तक सवाल उठने लगे। आखिर इतनी बड़ी राशि खर्च करने का निर्णय किन आधारों पर लिया गया? क्या जमीन की वास्तविक जरूरत थी। क्या खरीद प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप् थी? इन सवालों के जवाब तलाशने केलिये सीएम पुष्करसिंह धामी ने शासन में सचिव रणवीर चौहान को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है।
सस्पेंशन से लेकर बर्खास्तगी तक
मामला सामने आने के बाद सरकार ने तत्कालीन कलेक्टर कमेन्द्र सिंह, नगर आयुक्त वरूण चौधरी और एसडीएम अजयवीर सिंह को निलंबित कर दिया था। उस वक्त भी इस कार्यवाही अभूतपूर्व माना गया था। लेकिन जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही का दायरा और बढ़ गया। अब मामला केवल निलंबन तक सीमित नहीं है। बल्कि तक आईएएस अधिकारी की सेवा समाप्ति की संस्तुति तक पहुंच गया है।
अब केंद्र सरकार की भूमिका अहम
चूंकि मामला अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों से जुड़ा है, इसलिए अंतिम निर्णय की प्रक्रिया में केंद्र सरकार की भी भूमिका रहेगी. राज्य सरकार ने दोनों आईएएस अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को प्रस्ताव भेजने का फैसला किया है।  इसके बाद केंद्रीय स्तर पर भी मामले की समीक्षा   है। कुछ बड़े अधिकारियों का कहना है कि राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह कार्रवाई मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भ्रष्टाचार के खिलाफ घोषित ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है।  सरकार का दावा है कि चाहे अधिकारी कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि सरकारी धन के उपयोग में अनियमितता या नियमों की अनदेखी पाई जाती है तो कार्रवाई तय है।

 

 

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