ग्वादर में चीन-पार्किस्तान से निपटने के लिये बलोचों ने नेवी बनाकर हमले शुरू किये

नई दिल्ली. पाकिस्तान का ब्लोचिस्थान लम्बे समय से गरीबी और अस्थिरता का शिकार रहा है। लेकिन जब चीन ने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के माध्यम से इस इलाके को अपने वैश्विक व्यापार नेटवर्क का हिस्स बनाने की योजना बनाई है।तब इसे पाकिस्तान के लिये गेमचेंजर बताया गया है। अरबों डॉलर के निवेशन, नयी सड़कें, रेल नेटवर्क और बंदरगाह के वादों के बीच एक नयी उम्मीद जरूर बनी है। लेकिन इसी के साथ एक नया संघर्ष भी पनप चुका था। यह संघर्ष सिर्फ विकास बनाम पिछड़ावन का नहीं, बलिक् पहचान, अधिकारी और संसाधनों पर नियंत्रण का बन गया है।
बलोचिस्तान के दक्षिण में स्थित ग्वादर पोर्ट इस पूरे विवाद का केन्द्र है। चीन इसे अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई प्रोजेक्ट) का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है। जहां से वह सीधे अरब सागर तक पहुंच बना सकता है। इससे चीन को मध्यपूर्व के तेल और वैश्विक व्यापार तक सीधी पहुंच मिलती है।लेकिन बलोचों की नजर में यह प्रोजेक्ट उनके लिये नहीं है। उनका मानना है कि उनकी जमीन ली जा रही है। उसके संसाधनों का उपयोग बाहरी ताकतें कर रही है। बदले में उन्हें न तो रोजगार मिल रहा है। क्षेत्र का विकास हो रहा है।ग्वादर शहर जो कभी एक शांत तटीय कस्बा था। अबवहां भारी सैन्य मौजूदगी है। जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी और बढ़ गयी है।
सीपीईसी में निवेश, कर्ज और बलोचों की नाराजगी
लगभग 60 अरब डीलर डॉलर से अधिक निवेश वाला सीपीईसी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को नयी दिशा देने के लिये लाया गया था। लेकिन समय के साम इसके कई नकारात्मक पहलू भी सामने आये। प्रोजेक्ट्स में अधिकतर काम चीनी कम्पनियों और इंजीनियरों को मिला है। जबकि स्थानीय लोगों को सीमित मौके ही मिले हैं।
समुद्र तक पहुंचा संघर्ष, BLA ने बनाई नौसेना
हालात तब और गंभीर हो गए जब BLA ने अपने नए नौसैनिक विंग हम्माल समुद्री रक्षा बल (HMDF) के गठन का ऐलान किया. यह सिर्फ एक प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि रणनीतिक बदलाव है. जिवानी क्षेत्र में गश्ती नौका पर हमले का दावा इस बात का संकेत है कि अब बलोच विद्रोह सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं रह गई हैं।  अगर यह रणनीति आगे बढ़ती है, तो ग्वादर पोर्ट और समुद्री व्यापार दोनों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता हैं।  यह चीन के लिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि उसका पूरा निवेश इसी क्षेत्र की स्थिरता पर टिका हुआ हैं।
क्या CPEC पाकिस्तान के लिए बन गया बोझ?
जिस CPEC को पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ कहा जा रहा था, वही अब उसके लिए चुनौती बना हुआ है. कर्ज का बोझ, सुरक्षा खर्च और प्रोजेक्ट्स की धीमी प्रगति ने इस प्रोजेक्ट पर सवाल खड़े कर दिए हैं।  “क्राउन ज्वेल” कहा जाने वाला ग्वादर पोर्ट अब तक अपेक्षित व्यापारिक गतिविधि नहीं ला पाया हैं।  इससे चीन और पाकिस्तान दोनों के लिए चिंता बढ़ गई हैं।

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