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चम्बल नदी में रेत भरने के 1 हजार डम्पर, ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली अपनी बारी करते हुए दिखाई दे रहे

मुरैना. चम्बल में अवैध रेत उत्खनन खुल्लम खुल्ला हो रहा है। 1 हजार से अधिक डम्पर, ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली नदी में रेत के लिये दिन भर फर्राटे भर रहे थे। माफिया जेसीबी से नदी को खोखला कर रहे है। लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। हालात ऐसे हैं कि एसपी ऑफिस 6 थाने के सामने से यह वाहन दिनभर दौड़ते हैं। लेकिन इन्हें कोई रोकने वाला नहीं है।
इसी गली में वन विभाग यानी डीएफओ ऑफिस है। लेकिन उधर का लाम भी कुछ सख्त नहीं है। जब कभी वन विभाग-पुलिस और माफिया का आमना-सामना हुआ। हंगामा जरूर बरपा, लेकिन न तो खनन रूका और न ही माफिया की दबंगयी कम हुई।

नेशनल हाईवे के नीचे अवैध रूप से मशीनों द्वारा रेत निकाली जा रही है।
नेशनल हाईवे के नीचे अवैध रूप से मशीनों द्वारा रेत निकाली जा रही है।

NGT की याचिका पर कोर्ट ने खनन रोकने दिए थे आदेश चंबल नदी में घड़ियाल और जलीय जीव संरक्षण के लिए रेत खनन बंद हो, इसके लिए एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने हाईकोर्ट (ग्वालियर बेंच) में एक याचिका दायर की थी।याचिका पर सुनवाई करते साल 2008 में हाईकोर्ट ने चंबल घड़ियाल सेंचुरी में जलीय जीव संरक्षण और विलुप्त होती घड़ियाल प्रजाति के संरक्षण के लिए रेत खनन पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी।हाई कोर्ट ने इसे रोकने के लिए एक टास्क फोर्स बनाने के भी आदेश दिए थे। वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस विभाग को यहां संयुक्त कार्यवाही करना था। टास्क फोर्स को मजबूत करने के लिए हाईकोर्ट के निर्देश पर एसएएफ की एक कंपनी भी वन विभाग को सौंपी गई थी, ताकि वह रेत खनन पर लगाम लग सके।हांलाकि जिस धंधे को रोकने के लिए इतना सब हुआ, वह बढ़ता ही गया। कोर्ट के आदेश के बाद भी रेत माफिया ने इस अवैध धंधे को जारी रखे हुए हैं।

मशीनों से रेत निकालकर ले जाते वाहन। किनारे पर इतने ऊंचे ढेर लगे हैं कि डंपर छिप जाए।
मशीनों से रेत निकालकर ले जाते वाहन। किनारे पर इतने ऊंचे ढेर लगे हैं कि डंपर छिप जाए।

ट्रैक्टर-ट्रॉली और डम्पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे
चम्बल नदी का नजारा राजघाट पर अचंभित करने वाला था। रेत खनन को लेकर जो बातें बताई जाती थी। सच्चाई तो उससे कहीं अधिक थी। नदी के किनारे जेसीबी से लेकर ट्रैक्टर-ट्रॉली लाइन से खड़ी थी। एक-एक कर जेसीबी की मदद से रेत ट्रॉलियों में लोड हो रही थी। यह सब कुछ रात में नहीं, भरी दोपहरी में लगभग 3 बजे हो रहा था। राजघाट के दोनों ओर माफिया चम्बल नदी के सीने को छलनी कर रहे थे। यह सब कुछ इतनी सहजता से हो रहा था। मानो इन्हें शासन-प्रशासन का डर ही नहीं, 100 से अधिक वाहन अवैध रेत ले जाने के लिये अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
लोग बोले- दिन-रात बेखौफ चलता है काम
राजघाट से लगी चंबल सफारी है, यहां वन अमला भी तैनात रहता है। बावजूद यह नजारा काफी चौंकाने वाला था। टीम सीधे तो माफिया के बीच नहीं गई, लेकिन इस काले धंधे से जुड़े लोगों से ऑफ कैमरा बात की तो उन्होंने कहा- यह कोई एक दिन का काम तो है नहीं। दिन-रात यहां यह सब चलता है। कोई भी हो, यहां आने के पहले सोचता है। वहीं, ग्रामीण कहते हैं- राज घाट नेशनल हाईवे-44 पर स्थित है। यह चंबल नदी के जरिए मुरैना एमपी और धौलपुर राजस्थान को जोड़ता है। इस रास्ते से नेताओं से लेकर बड़े अधिकारी तक गुजरते हैं, लेकिन माफिया में इनका कोई भय नहीं दिखता।
आपको एक नजर में दिखने वाले 100 से ज्यादा वाहन हकीकत में बहुत कम हैं। यहां के हालात इतने खराब हैं कि दिनभर में 1 हजार से ज्यादा वाहन अवैध रेत लेकर यहां से निकलते हैं। रेत की सबसे अधिक डिमांड उत्तर प्रदेश के आगरा में होती है। इसके अलावा राजस्थान के धौलपुर, बाड़ी, सैंया सहित एमपी के ग्वालियर में भी रेत यहां से जाती है।

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