लोन खत्म कराने के नाम पर लाखें की ठगी, फेक कस्टमर केयर नम्बर पर रूपये जमा करये, न ही पैसा और न ही NOC

ग्वालियर एक लोन को क्लोज कराकर एनओसी पाने के चक्कर में जिम संचालक धोखाधड़ी का शिकार हो गया है। जिस कम्पनी से उसने लोन लिया था। उसके कस्टमर केयर पर बात की तो कोई हेल्प नहीं मिली और इसके बाद वेबसाइट से लोन क्लोजर के लिये एक नम्बर मिला। जिस पर कॉल किया तो वहां से बात करने वाले एक ही दिन में क्लोज कर एनओसी देने का आश्षवान दिया और इसके बाद फायनेंस कम्पनी के नाम से जिम संचालक को एक लोन क्लोजर मेल आया। फिर एक अकाउंट नम्बर दिया। इस अकाउंट में जिम संचालक ने 5.41 लाख रूपये आरटीजीएस कर दिये। इसके बाद न उसे पैसा वापिस मिला न ही लोन क्लोज की एनओसी मिली। ठगी का अहसास होते ही जिम संचालक पुलिस के पास पहुंचा और शिकायत की है।
क्या है घटनाक्रम
शहर के लश्कर हुजरात पुल धर्मेन्द्र ट्रेवल्स के पास निवासी देवेन्द्र सिंह पुत्र राजबहादुर सिंह गुर्जर पेशे से जिम संचालक हैं। जयेन्द्रगंज राजीव प्लाजा में उनकी AD फिटनेस पॉइंट के नाम से जिम है। पिछले साल 18 अक्टूबर 2023 को देवेन्द्र ने लेंडिंगकार्ट फाइनेंस लिमिटेड (फाइनेंस कंपनी) से जिम में नई मशीन लगाने के लिए 7.74 लाख रुपए का लोन लिया था। लोन उसे उनके एक परिचित ने दिलवाया था। काम अच्छा चलने पर वह समय से अपनी किस्त जमा कर रहा था। एक-दो जगहों से उसका फंसा हुआ पैसा वापस आ गया था। जिस पर वह लोन की शेष राशि जमा करके लोन अकाउंट क्लोज कराना चाहता था। जब वह कंपनी के लोकल ऑफिस गया तो यहां उसे रिस्पोंस नहीं मिला। इसके बाद इंटरनेट से फाइनेंस कंपनी का कस्टमर केयर नंबर सर्च किया और बातचीत की तो वह लोन क्लोज करने में ज्यादा रूचि नहीं ले रहे थे। यहीं से देवेन्द्र को एक मोबाइल नंबर मिला जिस पर संपर्क कर लोन क्लोज हो जाने की सलाह दी गई।
विश्वास जीतकर अकाउंट में डलवाए 5.41 लाख रुपए
कस्टमर केयर की वेबसाइट से मिले मोबाइल नंबर पर 29 अगस्त 2024 को जब देवेन्द्र ने संपर्क किया तो कॉल रिसीव करने वाले ने विश्वास दिलाया कि आज ही के दिन उनका लोन क्लोज हो जाएगा। इसके बाद जिम संचालक का विश्वास जीतने के लिए उसके रजिस्टर्ड ई-मेल पर care@lendingkarts.com से एक मेल से एक फोर्स क्लोजर लेटर आया। जिसमें देवेन्द्र के लोन से संबंधित सभी जानकारी थीं। इससे देवेन्द्र को विश्वास हो गया कि वह सही जगह बातचीत कर रहा है। अब कॉल करने वाले ने उसे एक अकाउंट नंबर भेजा जिसमें लोन की शेष राशि ट्रांसफर करने के लिए कहा। यह अकाउंट बैंक ऑफ महाराष्ट्र का है। देवेन्द्र ने रुपए ट्रांजेक्शन कराने से पहले जब अकाउंट नंबर की डिटेल चेक की तो यह भी फाइनेंस कंपनी के नाम पर था। इसके बाद उसने बैंक से 5.41 लाख रुपए ट्रांसफर करा दिए। अब उसे बोला गया कि शाम तक NOC मिल जाएगी।

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