राहत • हाईकोर्ट ने हटाई 15 साल की सीमा-दैनिक वेतनभोगियों की नौकरी के पहले दिन से गिनी जाएगी पेंशन सेवा
ग्वालियर। मप्र हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने जल संसाधन विभाग के नियमित हो चुके दैनिक वेतनभोगियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नियमितीकरण से पहले की शुरुआती 15 साल की सेवा को पेंशन गणना में शामिल करने का आदेश दिया है। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच ने 26 अक्टूबर को मुन्नीद प्रसाद और अन्य कर्मचारियों की अपील स्वीकार कर सिंगल बेंच का आदेश बदल दिया।
अपीलकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट एमपीएस रघुवंशी ने दलील दी कि दैनिक वेतनभोगी होने के बावजूद कर्मचारियों को मासिक आधार पर भुगतान किया जाता था।
समझें… फैसले से ये बदलेगा
मान लीजिए
किसी कर्मचारी ने 1988 में दैनिक वेतन पर नौकरी शुरू की और 2005 में नियमित हुआ।
पहले के आदेश में-नियमितीकरण से पहले की 17 साल की नौकरी में शुरुआती 15 साल छोड़कर केवल 2 साल पेंशन की गणना में जुड़ते थे।
नए फैसले में
नियमितीकरण से पहले की पूरी 17 साल की पात्र सेवा जुड़ेगी। इसके बाद की नियमित सेवा भी गिनी जाएगी।
सीधा फायदा
पेंशन योग्य सेवा 15 साल बढ़ जाएगी। वास्तविक पेंशन राशि कर्मचारी की पात्रता और लागू नियमों के आधार पर तय होगी।
दैनिक वेतनभोगियों की नौकरी के पहले दिन से पेंशन सेवा
वर्ष 1979 के पेंशन नियमों के तहत स्थायी दर्जा मिलने के बाद नियमितीकरण से पहले की पूरी पात्र सेवा पेंशन में गिनी जानी चाहिए। शुरुआती 15 साल छोड़कर पेंशन की गणना करना उचित नहीं है। इन कर्मचारियों ने वर्ष 1988 या उससे पहले नौकरी शुरू की थी। वर्ष 2004-05 में इन्हें नियमित किया गया। सितंबर 2025 में सिंगल बेंच ने आदेश दिया था कि दैनिक वेतन पर 15 साल पूरे होने के बाद की सेवा ही पेंशन में जुड़ेगी। इसी सीमा को कर्मचारियों ने चुनौती दी थी।
डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि वर्ष 1979 के पेंशन नियमों के तहत छह साल की निर्धारित सेवा पूरी होने पर पात्र कर्मचारी को स्थायी दर्जा मिलता है। इसके बाद पेंशन की गणना में उसकी शुरुआती सेवा भी शामिल होगी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के प्रेम सिंह मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पहले की पात्र सेवा को केवल नियमितीकरण से पहले की होने के कारण नहीं छोड़ा जा सकता। अदालत ने अपीलकर्ताओं की पहली नियुक्ति से पेंशन योग्य सेवा गिनने का आदेश दिया है। हालांकि, पेंशन भुगतान की कोई अलग समयसीमा तय नहीं की गई है।
