कूनो के रेडियो कॉलर वाले चीता शावक को मारी गोली, इलाज के दौरान मौत; सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
श्योपुर. कूनो नेशनल पार्क से बाहर घायलावस्था में मिले मादा चीता निर्वा के 19 माह के शावक की मौत हो गई, उसको गोली मारी गइ थी। शावक के शरीर में पांच छार्रे मिले है। इसमें एक छर्रा फेफडे के पास मिला। फेफडे के आसपास के ऊतकों के गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने से चीता शावक की मौत हुई। चीता पुनर्वास परियोजना शुरू होने के चार वर्षें में इस तरह की यह पहली घटना है। पीसीसीएफ, वाइल्ड लाइफ डॉ. समीता राजौरा ने बताया कि कूनों पार्क के बाहर विजयपुर वन परिक्षेत्र में शावक के घायल अवस्था में मिलने पर किए गए एक्स-रे में उसके शरीर के भीतर अलग-अलग जगहों पर कई बाहरी वस्तुएं यानी फारेन बॉडी पाई गई। विशेषज्ञों से परामर्श के बाद विस्तृत जांच और गहन उपचार के लिए नानाी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर के सर्जरी एवं रेडियोलॉजी विभाग में उसे शिफ्ट किया गया। सीटी स्कैन में पता चला कि कई बाहारी वस्तुओं ने उसके आंतरिक अंगों, मांसपेशी-हड्डी तंत्र और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाया है।
जबलपुर में हुई आपातकालीन सर्जरी
जबलपुर में शावक की आपातकालीन सर्जरी की गई, जिसके दौरान उसके शरीर से पांच छर्रे यानी फायरआर्म पेलेट्स निकाले गए। इसके बावजूद शावक को बचाया नहीं जा सका। फेफड़े के पास मिला छर्रा सबसे घातक साबित हुआ। फेफड़े के आसपास के ऊतकों के गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने से उसकी मौत हो गई।
चीता निगरानी तंत्र पर उठे सवाल
इस घटना ने चीता निगरानी तंत्र पर सवाल उठाए हैं। जांच के लिए SIT गठित की गई है। शावक की मौत के बाद वन विभाग ने शिकारियों तक पहुंचने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। चीतों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ट्रैकिंग टीम और सैटेलाइट कॉलर आईडी का इस्तेमाल किया जाता है। निगरानी के बावजूद शावक के घायल होने की जानकारी समय रहते क्यों नहीं मिल सकी और शिकारियों ने वन क्षेत्र में घुसकर गोली कैसे चला दी, यह जांच का विषय है। इससे पहले इस क्षेत्र में छह तेंदुओं के शिकार की घटना भी सामने आई थी।
