38 हजार कोटवारों का सरकार के खिलाफ मोर्चा, नियमितीकरण और वेतन वृद्धि की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पर धरना
गांधी जयंती से 30 अक्टूबर तक आंदोलन के जरिए सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश, सात सूत्रीय मांगों के निराकरण पर अड़े कोटवार
ग्वालियर। मध्यप्रदेश में कार्यरत कोटवार अपनी लंबित मांगों के निराकरण और न्यायोचित अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। प्रदेश के करीब 38 हजार कोटवारों ने अपनी सात सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी क्रम में ग्वालियर में कोटवार सुबह से कलेक्ट्रेट पर धरने पर बैठे हैं। कोटवारों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
कोटवारों के आंदोलन का प्रमुख मुद्दा 10 वर्ष की सेवा अवधि पूरी कर चुके कर्मचारियों का नियमितीकरण और मानदेय में वृद्धि है। आंदोलनकारियों ने मांग की है कि सरकार उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करे और लंबित मांगों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करे। कोटवारों ने गांधी जयंती से 30 अक्टूबर तक विरोध प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन धरने के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद करने का निर्णय लिया है।
नियमितीकरण से लेकर 10 लाख रुपये की सहायता तक प्रमुख मांगें
कोटवारों की प्रमुख मांग है कि 10 वर्ष की सेवा अवधि पूरी कर चुके कोटवारों को नियमित किया जाए। इसके साथ ही पात्रता का परीक्षण कर उन्हें सेवा-मालगुजारी भूमि का स्वामित्व प्रदान किया जाए। कोटवारों ने मानदेय में प्रतिवर्ष 500 रुपये की वृद्धि करने और वर्दी संबंधी नियम लागू करने की भी मांग उठाई है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि शहरी एवं नगरीय क्षेत्रों में कोटवार पद पर नियुक्ति बंद करने संबंधी राजस्व विभाग के आदेश को निरस्त किया जाए। साथ ही, कोटवार परिवार के सदस्य को निर्धारित योग्यता के आधार पर नियुक्ति देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
सेवाकाल में मृत्यु पर 10 लाख, सेवा मुक्ति राशि 5 लाख करने की मांग
कोटवारों ने सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर उनके परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है। इसके अलावा सेवा मुक्ति के समय दी जाने वाली राशि को वर्तमान एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।
कोटवारों का कहना है कि वे ग्रामीण प्रशासन और राजस्व व्यवस्था में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं, लेकिन उनकी सेवा शर्तों, मानदेय और भविष्य की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का अब तक न्यायोचित समाधान नहीं हुआ है। आंदोलन के माध्यम से वे सरकार से अपनी मांगों पर ठोस निर्णय लेने की अपेक्षा कर रहे हैं। कोटवारों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर उचित समाधान निकाला जाना चाहिए। अब देखना होगा कि प्रदेश सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और आंदोलन समाप्त कराने के लिए क्या कदम उठाती है।
