शीतला माता मंदिर सड़क दुर्घटना पर जनहित याचिका, हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, डीजीपी, प्रिसिंपल सेक्रेट्री गृह, ट्रासपोर्ट, राजस्व, संभागायुक्त, डीएम और एसपी से मांगा जवाब

ग्वालियर. शीतलामाता मंदिर मार्ग पर शनिवार-रविवार की मध्यरात्रि में हुए भीषण सड़क दुर्घटना में अब हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी है। एडवोकेट अभिषेक जाट की याचिका पर सोमवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एमपी के मुख्य सचिव, गृह, राजस्व और परिवहन विभाग के प्रमुख सचिवो समेत 10 पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जनहित याचिका में हादसे की जांच के साथ धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और प्रशासनिक तैयारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गयी है।
जनहित याचिका में राज्य सरकार, डीजीपी, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, संभागायुक्त मनोज खत्री, कलेक्टर रूचिका चौहान, एसपी और आरटीओ समेत संबधित विभागों एवं अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। जनहित याचिकाकर्ता का कहना है कि मामला केवल सड़क दुर्घटना का नहीं, बल्कि धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्थाओं और यातायात नियंत्रण की प्रभावशीलता का भी है।

भारी वाहन प्रतिबंधित थे तो ट्रक कैसे पहुंचा
जनहित याचिका के अनुसार सड़क दुर्घटना की रात लगभग 1.30 बजे धान से भरा ट्रक चीनोर की ओर से सातऊ गांव स्थित शीतला माता मंदिर जाने वाले रास्ते पर नीचे उतरते वक्त बेकाबू ही गया। ट्रक ने मंदिर जा रहे और वहां से लौट रहे श्रद्धालुओां के साथ सड़क किनारे मौजूद दुकानदारों को भी टक्कर मारी। इसके बाद वह मंदिर के प्रवेश इलाके से जा टकराया। सड़क दुर्घटना 16 लोगों की मौत हो गयी। जबकि 41 लोग घायल हुए। जनहित में मीडिया रिपोर्टो का हवाला देते हुए कहा गया है कि नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही को देखते हुए इस मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित था। इसके बावजूद ट्रक प्रतिबंधित इलाके में कैसे पहुंचा। जबििक वहां बैरिकेडिंग और पुलिस चैक प्वॉइंट होने की बात सामने आयी थी। इसकी जांच कराई जानी चाहिये।
गूगल मैप और ब्रेक फेल होने के दावों की जांच की मांग
याचिका में प्रकाशित खबरों के आधार पर ट्रक के गूगल मैप के सुझाए छोटे रास्ते से आने और ब्रेक फेल होने के दावों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, याचिकाकर्ता ने इन्हें हादसे का अंतिम कारण नहीं माना है। याचिका में ट्रक की मैकेनिकल जांच रिपोर्ट, उसके तय और वास्तविक मार्ग तथा दुर्घटना के कारणों का साक्ष्यों के आधार पर पता लगाने की मांग की गई है।जनहित याचिका में शीतला माता मंदिर और वहां पहुंचने वाले मार्ग का सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग भी की गई है। इसमें श्रद्धालुओं और वाहनों के लिए अलग-अलग रास्ते, मजबूत बैरिकेडिंग, भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रभावी नियंत्रण, पर्याप्त पुलिस बल, आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता और चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया है।
याचिका में धार्मिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की गई है।
एफआईआर, पुलिस ड्यूटी और CCTV फुटेज का रिकॉर्ड मांगा
याचिकाकर्ता ने हादसे से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य सुरक्षित रखने तथा अदालत के सामने प्रस्तुत करने के निर्देश देने की मांग की है।इनमें एफआईआर, जांच की स्थिति, भारी वाहनों पर प्रतिबंध के आदेश, ट्रैफिक डायवर्जन प्लान, पुलिसकर्मियों की ड्यूटी और तैनाती के रिकॉर्ड, वायरलेस संदेश, सीसीटीवी फुटेज, वाहन की तकनीकी जांच रिपोर्ट और बचाव एवं चिकित्सा सहायता से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।इसके अलावा, हादसे के बाद हुई प्रशासनिक जांच और संबंधित विभागों की ओर से की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड भी अदालत में पेश करने की मांग की गई है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक और जिम्मेदारी का पता लगाया जा सके।
