प्रमुख श्रमिक समस्याओं के त्वरिंत निराकरण एवं चर्चा हेतु समय प्रदान करने के संबंध में- इंटक

ग्वालियर, हमारा संगठन व्यवसायिक अधिनियम 1926 के तहत पंजीकृत होकर भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) से सम्बद्ध संघ है, जो मध्य प्रदेश राज्य की सभी विद्युत कंपनियों के नियमित / संविदा एवं ठेका श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करता है और उनको श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले अधिकारों को समय समय पर प्रशासन व प्रबंधन को अवगत कराकर, उनके सार्थक समाधान सदैव प्रयासरत रहता है।
श्रमिकों की प्रमुख मांगे
1. भाजपा जनसंकल्प 2013 के पृष्ठ क्र. 33 बिंदु 06 के वादा अनुरूप बिना शर्त वरिष्ठता देते हुए विद्युत संविदा कर्मचारियों को रिक्त पदों पर विभागीय सेटअप के माध्यम से नियमित किया जावे। पूर्व में भी बिना परीक्षा लिए विभागीय सेटअप से निम्नलिखित विभागों में संविदा कर्मचारियों को नियमित किया गया है :-
• पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आदेश क्रमांक एफ – 2- 5 / 22 / 4 – 1 / 08 भोपाल दिनांक 04.09.2008 जारी कर संविदा को नियमित किया गया।
• म.प्र. शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आदेश क्र. एफ – 44 – 6 / 2014 / 20-2 दिनांक 10-02-2024 गुरु जी / संविदा शिक्षक से अध्यापक संवर्ग में संविलियन किया गया।
• म.प्र. विपणन संघ (मार्कफेड) द्वारा आदेश क्र. 2394 दिनांक 28-11-2020 एवं 7727 दिनांक 16-02-2021 के माध्यम से 101 संविदा कर्मियों को विभागीय सेटअप से नियमित किया गया।
• म.प्र. सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश क्र. 958 के द्वारा जन अभियान परिषद के संविदा कर्मचारियों को बिना परीक्षा लिए नियमित किया गया।
• श्रम विभाग म.प्र. शासन अंतर्गत भवन एवं संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मचारियों को सेवा भर्ती नियम बनाकर नियमित किया गया है।
2. विद्युत कंपनियों में वर्षों से कार्यरत अनुभवी आउटसोर्स कर्मचारियों का कंपनियों में संविलियन अथवा भाजपा जनसंकल्प 2023 पृष्ठ 81 बिंदु क्र. 07 के अनुसार संविदा का लाभ दिया जावे।
3. म.प्र. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के द्वारा परीक्षण सहायक नियमित बैच 2013 – 14 की प्रतीक्षा सूची से संविदा पर नियुक्त परीक्षण सहायकों को वरिष्ठता देते हुए नियमित किया जावे।
महोदय, उक्त प्रकरण में माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर WP 19334/2023 के द्वारा पारित निर्णय दिनांक 21-04-2026 के माध्यम से मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अंतर्गत कार्यरत परीक्षण सहायक नियमित बैच 2013 की प्रतीक्षा सूची से 13 वर्षों से संविदा पर नियुक्त परीक्षण सहायकों को नियमित करने के संबंध मे निर्देशित किया गया है।
4. वर्ष 2018 में तत्कालीन म.प्र. कांग्रेस सरकार द्वारा तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की परिवीक्षा अवधि 3 वर्ष करते हुए प्रथम वर्ष 70 % द्वितीय वर्ष 80 % एवं तृतीय वर्ष 90 % वेतन देने हेतु आदेश जारी किया गया था। उक्त आदेश से कर्मचारियों को आर्थिक हानि एवं उनमे हीनता की भावना पैदा हो रही है तथा इस तरह के आदेश से अधिकारियों कर्मचारियों के बीच अंतर प्रदर्शित होता है।
उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा अपने आदेश 06.01.2026/WP-13195-2023 में नवीन नियुक्त कर्मचारियों को दिए जा रहे 70%,80%,90% वेतन नियम को अमान्य घोषित किया गया है। उक्त नियम मध्य प्रदेश शासन द्वारा राजपत्र 12.12.2019 के माध्यम से लागू किया गया था, जिसे उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया गया है। अतः उक्त आदेश निरस्त किया जावे।
5. विद्युत कंपनियों में कार्यरत नियमित / संविदा कर्मचारियों को म.प्र. शासन के अन्य विभागों की तरह ही कंपनियों के कर्मचारियों को एक कंपनी से दूसरी कंपनी में स्थानांतरण हेतु निर्देश जारी किया जावे।
6. म.प्र. विद्युत मंडल के समय के वर्ष 1989-1998 के मध्य विभिन्न वेतन निर्धारणों में कार्यालय सहायक श्रेणी-3/समकक्ष वेतनमानों में हुई विसंगतियों पर उच्च न्यायालय आदेशानुसार भुगतान किया जावे।
उच्च न्यायालय (खंडपीठ इन्दौर) द्वारा रिट अपील क्र.1714/2019 पर पारित आदेश दिनांक 07-11-25 एवं माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा रिट अपील क्र. WP / 29537/2018 में पारित आदेश 19.01.2026 के माध्यम से कर्मचारियों के साथ हुई वेतन विसंगति सम्बन्धी अन्याय पर निर्णय देकर म.प्र. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमि. जबलपुर को आदेशित किया है कि वे वर्ष 1989 – 1998 के पश्चात म.प्र. विद्युत मंडल में कार्यालय सहायक श्रेणी – 3 / समकक्ष वेतनमान वाले पदों पर नियुक्त हुए कर्मचारियों को उनके वेतनमान का पुनः निर्धारण कर अंतर की राशि का शीघ्र भुगतान हेतु निर्देश जारी किया गया है।
7. ऊर्जा विभाग की उत्तरवर्ती विद्युत कंपनियों में कार्यरत कंपनी कैडर नियमित / संविदा एवं सेवानिवृत कर्मचारियों को भी बोर्ड / मंडल कर्मचारियों की तरह विद्युत बिल में 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जावे।
8. ऊर्जा विभाग की उत्तरवर्ती विद्युत् कंपनियों में विभिन्न स्थानों पर कंपनियों की रिक्त पड़ी भूमि पर अनाधिकृत लोगों द्वारा अधिग्रहण (कब्जा) किया जा रहा है। अतः उक्त भूमि / जमीन के सीमांकन एवं संरक्षण हेतु समुचित निर्देश जारी किये जावे एवं जबाबदेही तय की जावे।
9. ऊर्जा विभाग कि उत्तरवर्ती विद्युत् कंपनियों के अंतर्गत भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर आदि विभिन्न स्थानों पर जर्जर पड़े आवासों का संधारण कार्य एवं नवीन आवासों का निर्माण कराये जाने हेतु समुचित निर्देश जारी करने हेतु अनुरोध है।

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