व्यापारियों ने QR कोड पर बांधी काली पट्टी, MDR के विरोध में UPI से भुगतान लिया न दिया, शुल्क वापिस लिया जाये

ग्वालियर. यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेन्ट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के विरोध में ग्वालियर के व्यापारियों ने बुधवार को नो यूपीआई डे मनाया गया। शहर के बाजारों में व्यापारियों ने अपनी शॉप और काउंटरों पर लगे क्यूआर कोड और स्केनर पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया है। व्यापारियों ने तय किया है कि बुधवार को न तो यूपीआई से भुगतान लिया जायेगा और न ही यूपीआई के जरिये भुगतान किया जायेगा। चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने तय किया है कि 23 सितम्बर को नो यूपीआई डे मनाने की अपील की है।
व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत आयेगी व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई को लंबे समय से डिजीटल और कैशलेस भुगतान के आसान जरिये के रूप में अपनाया गया है। अब बड़े मर्चेन्ट यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाये जाने से व्यापारियिों पर अतिरिक्त लगात आयेगी। उनका कहना है कि पहले से जीएसटी, इनकम टैक्स सहित अन्य करों का भुगतान करने वाले व्यापारियों पर अतिरिक्त4 शुल्क का बोझ नहीं डाला जाना चाहिये।
15 अक्टूबर से लागू होगा एमडीआर
केन्द्र सरकार द्वारा घोषित नये ढांचे के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2 हजार रूपये ज्यादा के चुनिंदा पर्सन टू मर्चेन्ट (पी2एम) के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू रहेगा। 75 हजार या उससे ज्यादा के लेन-देन पर एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रूपये रखी गयी है। 2 हजार तक के पी2एम लेनदेन और पात्र छोटे व्यापारियों के लिये शून्य एमडीआर व्यवस्था जारी रहेगी। केन्द्र ने यह भी स्पष्ट किया हैकि एमडीआर सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है। व्यापारियों से ग्राहकों पर यह शुल्क डालने की अपेक्षा नहीं है।
महाराज बाड़ा से कंपू तक बाजारों में विरोध
नो UPI डे में महाराज बाड़ा, बाड़ा मार्केट, मोर बाजार, टांगा स्टैंड और कंपू समेत शहर के प्रमुख बाजारों के व्यापारी शामिल हुए। दुकानों पर QR कोड और साउंड बॉक्स को काले कपड़े से ढंककर व्यापारियों ने सोशल मीडिया पर भी विरोध दर्ज कराया। चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि MDR को लेकर व्यापारियों में नाराजगी है। कार्यकारिणी की बैठक में 23 सितंबर को नो UPI डे मनाने का निर्णय लिया गया था। व्यापारियों की मांग है कि UPI जिस व्यवस्था के तहत अभी चल रहा है, उसे उसी तरह जारी रखा जाए।
व्यापारियों का कहना है कि UPI भुगतान की मौजूदा व्यवस्था को जारी रखा जाए। उनका तर्क है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद अब उस पर शुल्क लगाने से व्यापारियों में असंतोष बढ़ेगा। नो UPI डे के जरिए व्यापारियों ने सरकार और संबंधित संस्थाओं तक अपनी मांग पहुंचाने का प्रयास किया है
