‘नियुक्ति से वित्तीय लाभ तक जांच के घेरे में राठौर-सक्सेना, NSUI का विवि में हल्लाबोल’

कुलगुरु जमीन पर बैठे और सुनीं शिकायतें, दो दिन में कार्रवाई का आश्वासन
ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय में नियुक्ति, नियमितीकरण और वित्तीय लाभों को लेकर सोमवार को एनएसयूआई ने जोरदार प्रदर्शन किया। अध्यक्ष पारस यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने कई गंभीर सवाल उठाते हुए विमलेंद्र सिंह राठौर और राजेश कुमार सक्सेना से जुड़े मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुलगुरु प्रो. दिवाकर राजपूत जमीन पर बैठ गए और कार्यकर्ताओं की शिकायतें सुनीं। उन्होंने पूरे मामले में दो दिन के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
एनएसयूआई ने ज्ञापन में दोनों मामलों से जुड़े नियुक्ति आदेश, नियमितीकरण प्रक्रिया, सेवा अभिलेख, पद स्वीकृति और वित्तीय लाभों की जांच कराने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि कई बिंदु ऐसे हैं, जिनकी दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्र जांच जरूरी है। जांच पूरी होने तक संबंधित कर्मचारियों को ऐसे महत्वपूर्ण दायित्वों से हटाने की मांग की गई है, जिनसे जांच प्रभावित होने की आशंका हो सकती है। इस ज्ञापन में वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष विशाल भदौरिया, जीवाजी वि.उपाध्यक्ष शुभम राजौरिया, साइंस कॉलेज अध्यक्ष मोहित भदौरिया, छात्र नेता मुनेन्द्र सिंह यादव, अरुण यादव , उद्देश यादव, संजय राणा, नीकेश यादव।
‘दैनिक वेतनभोगी से पीआरओ तक कैसे पहुंचे राठौर?’
एनएसयूआई ने विमलेंद्र सिंह राठौर की वर्ष 1998 में 89 दिवस के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में नियुक्ति से लेकर वर्तमान दायित्व तक की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की। संगठन ने पूछा कि उनकी सेवा किस नियम और आदेश के तहत आगे बढ़ी तथा समन्वयक पद की स्वीकृति और नियुक्ति किस आधार पर हुई। वर्ष 1998 से अब तक मिले वेतन, भत्ते, एरियर और अन्य वित्तीय लाभों के विशेष ऑडिट की मांग भी की गई है।
सक्सेना के नियमितीकरण और ग्रेड-पे पर भी सवाल
एनएसयूआई ने राजेश सक्सेना के वर्ष 1995 के संविदा नियुक्ति से नियमितीकरण तक की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। 14 मई 2012 से भूतलक्षी प्रभाव से नियमितीकरण, 1900 से 2800 ग्रेड-पे, समयमान वेतनमान, वेतन पुनर्निर्धारण, एरियर और अन्य वित्तीय लाभों की नियमसंगतता की जांच की मांग की गई है। संगठन ने संबंधित सेवा पुस्तिका, नोटशीट, व्यक्तिगत फाइल, विधिक राय और नियमितीकरण समिति के दस्तावेज सुरक्षित रखने की मांग की।
ईओडब्ल्यू-लोकायुक्त भेजने की मांग
एनएसयूआई ने दोनों मामलों में उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने, मूल अभिलेख सुरक्षित रखने और जांच के दौरान संबंधितों को महत्वपूर्ण दायित्वों से हटाने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर राशि की वसूली की जाए और प्रथमदृष्टया अनियमितता प्रमाणित होने पर मामला ईओडब्ल्यू व लोकायुक्त को भेजा जाए।एनएसयूआई अध्यक्ष पारस यादव ने कहा कि संगठन किसी व्यक्ति को जांच से पहले दोषी घोषित नहीं कर रहा है, बल्कि नियुक्ति, नियमितीकरण और वित्तीय लाभों से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष जांच चाहता है।

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