MP में पॉवर सेंटर बने नरोत्तम मिश्रा, बोले कैप्टन जहां बोलेंगे फील्डिंग करेंगे
भोपाल. मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों नरोत्तम मिश्रा से नेताओं की मुलाकात चर्चा में है। न विधानसभा सदस्यता, न सरकार में पद और दतिया उपचुनाव में टिकट भी नहीं मिला। इसके बावजूद 11 दिन में 7 बड़े नेता उनसे मिल चुके हैं। इनमें मंत्री, संगठन पदाधिकारी, विधायक और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शामिल हैं। बातचीत में नरोत्तम ने इसे दोस्ताना मुलाकात बताया। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इन मुलाकातों को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और ब्राह्मण समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।

नरोत्तम की भूमिका को लेकर अटकलें तेज
दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष और भोपाल में मंत्रियों से मुलाकात के बाद नरोत्तम की भूमिका को लेकर अटकलें तेज हैं। हालांकि, नरोत्तम ने इन मुलाकातों को गैर-राजनीतिक और मित्रवत बताया। दतिया चुनाव हारने और उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बावजूद नेताओं के मिलने पर उन्होंने कहा, “मैं 30 साल विधायक रहा हूं, 5 बार मंत्री रहा हूं। सभी से मेरे मित्रवत संबंध हैं।
इन मुलाकातों के पीछे का सियासी गणित
बीजेपी में फिलहाल किसी बड़ी उठापटक की संभावना नहीं है। बीते दो दशक से बीजेपी के भीतर गुटबाजी या उठापटक की कोई जगह नहीं है। सारे फैसले हाईकमान के स्तर पर होते हैं और अनुशासन के कारण कोई बयानबाजी नहीं होती। राजनीतिक विशेषज्ञ एक दूसरे पहलू की ओर भी इशारा करते हैं। मार्च 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां ब्राह्मण वोट महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बीजेपी इस वर्ग को नाराज नहीं करना चाहती। हाल ही में दिनेश शर्मा को चुनाव से पहले राज्यपाल बनाया जाना भी इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
