ई रिक्शा राष्ट्रीय समस्या है, 20 हजार से अधिक ई-रिक्शा है बेलगाम, न लायसेंस और चालकों का न लायसेंस-हाईकोर्ट

सड़कों पर हर तरफ नजर आते हैं ई-रिक्शा, लगता है जाम। - Dainik Bhaskar

ग्वालियर. चम्बल-ग्वालियर संभाग समेत मध्यप्रदेश की सड़कों पर यातायात व्यवस्था में बड़ी बाधा बन रहे ई-रिक्शा के बेकाबू संचालन पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने सख्त रूख अपनाया है। गुरूवार को हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने इनको (ई-रिक्शा) को राष्ट्रीय समस्या तक कह दिया है। शुक्रवार की टीम इस सख्त टिप्पणी के पीछे की हकीकत जानने सड़कों पर निकली तो वास्तव में सच्चाई सामने आयी।
ग्वालियर की सड़कों पर 20 हजार से अधिक ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन ई-रिक्शा के बेलगाम पहिये शहर में जगह-जगह यातायात की जाम की परेशानी का सबब बने हुए है। यही वजह हैकि जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की युगल पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश जारी करते हुए केन्द्र और राज्य सरकार को ई-रिक्शा के लिये नियम कायदे और रूट परमिट नीति तय करने के लिये सख्त समय सीमा निर्धारित की है।
याचिका में उठाए गए 3 मुख्य मुद्दे
सामाजिक कार्यकर्ता निशा गुर्जर द्वारा दायर जनहित याचिका पर पैरवी करते हुए अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्रा ने सड़कों पर बढ़ रहे ई-रिक्शा के दबाव से जुड़े तीन अहम बिंदु अदालत के समक्ष रखे हैं।
10 साल से बिना नियम संचालन: पिछले एक दशक से बिना किसी ठोस नियामक नीति के ई-रिक्शा चलाए जा रहे हैं, जिससे शहरों में जाम और अराजकता की स्थिति बन रही है।
रूट परमिट का अभाव: बिना किसी रूट निर्धारण के ई-रिक्शा कहीं भी घुसा दिए जाते हैं।
परमिट धारकों से अन्याय: लाखों रुपए का भारी-भरकम टैक्स और परमिट फीस चुकाने वाले व्यावसायिक वाहन चालकों के हितों को बिना परमिट दौड़ रहे ई-रिक्शा के कारण भारी नुकसान हो रहा है।
60 दिन में नीति बनाए केंद्र, 120 दिन में लागू करे राज्य
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की युगल पीठ ने केंद्र सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा मध्य प्रदेश शासन को निम्नलिखित समय-सीमा में नीति लागू करने का निर्देश दिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय अगले 60 दिनों के भीतर ई-रिक्शा की संख्या, रूट परमिट और ट्रैफिक नियंत्रण को लेकर एक राष्ट्रव्यापी नीति तैयार कर सभी राज्यों को भेजेगा मध्य प्रदेश सरकार परिवहन आयुक्त के परामर्श से अपनी भौगोलिक और जनसांख्यिकीय स्थिति के अनुसार नीति में आवश्यक संशोधन करेगी।
अंतिम समय-सीमा (120 दिन)
आज से ठीक 120 दिनों के भीतर ई-रिक्शा चालकों और मालिकों के लिए एक समग्र नीति अधिसूचित कर लागू की जाएगी। यदि 120 दिनों में नीति लागू नहीं होती है, तो याचिकाकर्ता को याचिका पुनर्जीवित कराने की छूट दी गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *