सिंधिया संपत्ति विवाद में प्रतिमा देवी की अर्जी स्वीकार, 7 अक्टूबर को होगी बहस
ग्वालियर. सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े विवाद में गुरुवार को जिला न्यायालय में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ प्रतिमा देवी की ओर से आदेश 9 नियम 7 के तहत प्रस्तुत आवेदन को न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है। अब प्रतिमा देवी की ओर से दर्ज आपत्ति पर सात अक्टूबर 2026 को बहस होगी। न्यायालय ने सभी पक्षों को अगली सुनवाई पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। हालांकि आवेदन स्वीकार होने का अर्थ यह नहीं है कि प्रतिमा देवी को संपत्ति में हिस्सा मिल गया है। उनके दावे और आपत्ति पर बहस के बाद ही न्यायालय आगे निर्णय करेगा।
प्रतिमा देवी ने एक्स पार्टी किए जाने पर भी सवाल उठाया
प्रतिमा देवी ने अपनी आपत्ति में कहा है कि संपत्ति विवाद से जुड़ी न्यायिक कार्यवाही में उन्हें उचित रूप से पक्षकार नहीं बनाया गया और अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। उनका कहना है कि उन्हें वसीयत तथा संपत्ति से संबंधित जरूरी दस्तावेजों की पूरी जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने अदालत को बताया कि उन्हें भेजे गए नोटिस नेपाल के नेपालगंज पते पर भेजे गए, जबकि वह करीब 20 साल से काठमांडू में रह रही हैं। इसी आधार पर उन्होंने खुद को एक्स पार्टी किए जाने पर भी सवाल उठाया है।
मां पद्मावती राजे के हिस्से का भी दावा
प्रतिमा देवी का तर्क है कि उनकी दिवंगत मां पद्मावती राजे सिंधिया संपत्ति में हिस्सेदार थीं। ऐसे में उनके उत्तराधिकारियों के अधिकार को नजरअंदाज कर संपत्ति के संबंध में समझौता नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पूर्व मंत्री यशोधरा राजे की ओर से प्रतिमा देवी की आपत्ति का जवाब पहले ही अदालत में पेश किया जा चुका है। जवाब में कहा गया है कि पूर्व में समझौते की प्रक्रिया के दौरान प्रतिमा देवी ने सहमति दी थी और खुद को प्रक्रिया से अलग रखा था, तो अब अंतिम चरण में आपत्ति दर्ज कराने का औचित्य क्या है।
दामाद सुनवाई में रहे मौजूद
गुरुवार की सुनवाई में प्रतिमा देवी स्वयं उपस्थित नहीं हुईं। उनकी ओर से उनके दामाद प्रतीक कारकी अदालत में मौजूद रहे। आवेदन स्वीकार होने के बाद अब प्रतिमा देवी की आपत्ति पर विधिवत बहस का रास्ता खुल गया है। सात अक्टूबर की सुनवाई में दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क रखेंगे।
