वंदेभारत स्लीपर ट्रेन 160 किमी प्रतिघंटे हाईस्पीड टेस्ट, कवच सिस्टम का भी टेस्ट
नई दिल्ली. ट्रेन में यात्रा करते समय यात्रियों की नजर आमतौर पर रफ्तार, समय और सुविधाओं पर रहती है। लेकिन ट्रेन जितनी तेज दौड़ती है। उनकी सुरक्षा उतनी हो बड़ी चुनौती बन जाती है। खासकर तब, जब रेलवे देश में सेमी हाई स्पीड ट्रेनों का नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी कर रहा हो। ऐसे में ट्रेन को तेज दौडाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। किसी भी खतरे की स्थिति में सुरक्षा सिस्टम कितनी तेजी और भरोसे के साथ काम करता है।
इसी कड़ी में भारतीय रेलवे ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हजरात निजामुद्दीन-पलवल रूट पर 16 कोच स्लीपर ट्रेन को 160 किमी प्रतिघंटे की स्पीड़ पर दौड़ाकर ‘‘कवच सेफ्टी सिस्टम का परीक्षण किया गया है। इस बीच खासतोर पर ट्रेन और स्टेशन के बीच कम्युनिकेशन सिस्टम की जांच की गयी है।
160 किमीप्रति घटें की रफ्तार से 50 किमी का सफर तय
उत्तरी रेलवे ने हजरत निजामुद्दीन-पलवल के बीच यह हाईस्पीड ट्रायल किया। इस सेक्शन पर पहलीबार 16 कोच वाली वंदेभारत स्लीपर ट्रेन को 160 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार पर चलाया गया है। ट्रेन 9 सितम्बर को दोपहर लगभग 1.38 बजे हजरत निजामुद्दीन से रवाना हुई और 2.21 बजे पलवल पहुंची। वहां लगभग 31 मिनट रूकने के बाद ट्रेन 2.52 बजे वापिस चली और 3.32 बजे हजरत निजामुद्दीन लौट आयी।
कैसे काम करता है कवच सिस्टम
कवच भारतीय रेलवे का स्वरदेशी ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटैक्शन सिस्टम है। इसका काम ट्रेन संचाजन के दौरान लोको पायलट को जरूरी चेतावनी देना और खतरे की स्थिति में सुरक्षा बढ़ना है। आवश्यकता पड़ने पर यह सिस्टम अपने आप ब्रेक भी लगा सकता है। कवच का मकसद सिग्नल उल्लंघन, ट्रेनों के बीच टक्कर और मानवीय गलती से जुड़े खतरे को कम करना है। जनवरी में रेल मंत्रालय ने बताया था कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में देश में विकसित कवच सिस्टम लगाया गया है।
