प्रशासन और एफसीआई आमने-सामने, हाईकोर्ट के आदेश भी जमा नहीं करे राशि, 60 की जगह 16.50 करोड़ रूपये किये जमा
FCI को 4चार सप्ताह के भीतर नोटिस की 50 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी
ग्वालियर- शासकीय नियमों की अनदेखी कर पांच दशक पूर्व मंदिर माफी की बेशकीमती भूमि पर केंद्रीय भंडारण निगम के गोदाम तानने वाले भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की मुसीबत बढ़ती जा रही है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी एफसीआई ने सिर्फ 16 लाख 50 हजार रुपए ही जमा कराए हैं। जबकि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार डिमांड नोटिस की राशि करीब 121 करोड़ की आधी रकम जमा कराई जानी थी, जो कि 60 करोड़ 78 लाख 06 हजार 063 रुपए होती है। ऐसे में अब एफसीआई पर पूरी राशि एकमुश्त जमा करने व जमीन से बेदखली का कानूनी संकट मंडराने लगा है।
1976 से अवैध कब्जे और बकाए का विवाद
अवैध निर्माण: एफसीआई ने वर्ष 1976 में मंदिर माफी की सर्वे क्रमांक 945, 951, 952, 953, 954, 968 और 969 के अंतर्गत आने वाली कुल 9 बीघा 13 बिस्वा जमीन पर भविष्य में आबंटन होने की उम्मीद में गोदामों का निर्माण करवा लिया था।वर्ष 1988 में प्रशासन ने जमीन के एवज में 3 लाख 19 हजार 174 रुपए की राशि तय कर 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर निर्धारित की। निगम ने आंशिक भुगतान किया, लेकिन बाकी देनदारी नहीं चुकाई।
बकाया: ब्याज जुड़ते-जुड़ते वर्ष 1999 तक यह राशि बढ़कर 33,16,922 रुपए हो गई। दबाव बनने पर एफसीआई ने वर्ष 2005 में महज 5,98,451 रुपए जमा किए और बाकी रकम टालने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।तत्कालीन हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव (धर्मस्व विभाग) को साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। प्रमुख सचिव ने 1999 की तय राशि पर 15% ब्याज जोड़ते हुए वसूली का सख्त आदेश जारी किया। आदेश में यह भी कहा गया कि एक माह में राशि जमा न करने पर भूमि का कब्जा लेकर इसे माफी विभाग को सौंपा जाए।
कलेक्टर ने जारी किया रेवेन्यू रिकवरी सर्टिफिकेट
प्रमुख सचिव के निर्देश पर ग्वालियर संभाग आयुक्त ने देनदारी का वित्तीय आकलन कराया। इसके बाद कलेक्टर कार्यालय द्वारा रेवेन्यू रिकवरी सर्टिफिकेट (आरआरसी) जारी किया गया। जिसके आधार पर तहसीलदार लश्कर ने निगम को 1 अरब 21 करोड़ 56 लाख 12 हजार 27 रुपए का रिकवरी नोटिस जारी कर दिया।इस नोटिस पर स्थगन पाने के लिए एफसीआई ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने अगस्त में दिए आदेश में स्पष्ट किया कि निगम चार सप्ताह के भीतर नोटिस की 50 प्रतिशत राशि (60.78 करोड़ रुपए) जमा कराए, तभी शेष राशि की वसूली रोकी जाएगी, अन्यथा पूरी राशि वसूलनीय होगी।
नियम अनुसार की जाएगी वसूली की कार्रवाई
केंद्रीय भंडार निगम ने हाईकोर्ट एवं अपर मुख्य सचिव के आदेशों की अवहेलना व गलत व्याख्या करते हुए नियत राशि 1,21,56,12,127 रुपए की 50 प्रतिशत राशि 60,78,06,063 रुपए के स्थान पर मात्र 16,50,000 रुपए जमा किए हैं। हाईकोर्ट के आदेश की अनुपालना नहीं करने से वसूली कार्रवाई पर लगा स्थगन आदेश स्वतः समाप्त हो गया है। इसलिए वसूली की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।
मनीष जैन, तहसीलदार
