जेसीबी से सड़क खोदकर गिनी परतें, जिसका भुगतान उतनी बनी कि नहीं बनी, जांच से खुलेगी सड़कों की पोल

ग्वालियर. शहर की सड़क निर्माण में कागजों पर जितनी मोटी लेयर स्वीकृत हुई थी, मौके पर उतनी बिछीं भी या नहीं, बिटुमिन और गिट्टी तय अनुपात में लगी या नहीं और सड़क की जितनी मजबूती के लिये पैसा दिया, उतनी मजबूती मिली या नहीं, ग्वालियर में पहलीबार सड़कों की लेयर खोलकर इन सवालों पर जवाब तलाशा जा रहा है।
हाईकोर्ट के बनाये 3 वकीलों में हिमांशु शर्मा, पवन रघुवंशी और गौरव समाधिया के आयोग ने बुधवार को एक्सपर्ट के साथ हनुमान टॉकीज तिराहे – गुढ़ा तिराहे के बीच 8 सैम्पल भरे। कोर कटिग मशीन से सड़क के गोल टुकड़े निकाले गये तो जेसीबी से रोड का हिस्सा खोदकर अंदर तक की परतें देखी गयी। अहम बात यह ह कि एसएएफ पेट्रोल पंप के सामन उसी सड़क से भी सैम्पल लिया गया, जिसे 2 दिन पहले उखाड़े जाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी।


अब खुलेगी सड़कों की पोल-स्वीकृत तकनीकी स्पेसिफिकेशन और मौके की मोटाई ही जांच की कसौटी
सड़क की स्वीकृत तकनीकी स्पेसिफिकेशन एक ओर होगा और मौके पर सड़क की मौटाई व लैब के नतीजे दूरी ओर। दोनों का मिलान ही बतायेगा कि भुगतान जिस क्वालिटी की सड़क के लिये किया गया है, सड़क वास्तव में उसी क्वालिटी की बनाई गयी या नहीं।
कितनी मजबूत है भीतर से सड़क डेंसिटी से चलेगा पता
सड़क से लिये कौर सैम्पल की डेंसिटी और एयर-वॉइड की जांच होगी। ज्यादा खाली जगह मिली तो इसका मतलब होगा कि सड़क की कम्पैक्शन निर्धारित स्तर की नहीं है।
सड़क खोदकर दिखाई अंदर की परतें
सड़क का हिस्सा खोदकर ऊपर से नीचे तक बनी परतों की मोटाई देखी गयी। अब इसका स्वीकृत डिजायन से मिलान होगा, जितनी मोटाई का पैसा मंजूर हुआ, सड़क में उतनी परत मिली या नहीं।
कोर कटर खोलेगा मजबूती -मोटाई का राज
मशीन से सड़क के बिटुमिन्स हिस्से के गोल सैम्पल निकाले गये है। लैब बतायेगी कि परत तय मोटाई में बिछी या नहीं और सड़क का र्प्याप्त दबाकर मजबूत किया गया है या नहीं।
जांच जारी रहेगी, 30 मिनट पहले सूचना
सैंपलिंग दोपहर 12 बजे शुरू हुई और रात 12 बजे तक चली। इस दौरान लोक निर्माण विभाग, नगर निगम और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अधिकारी मौजूद रहे।
अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश शुक्ला, याची के अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर, एनएचएआई के अधिवक्ता आशीष सारस्वत और निगम अधिवक्ता गौरव मिश्रा भी मौजूद रहे।
शहरभर में सड़कों की जांच आगे भी जारी रहेगी, लेकिन अगली सड़क आयोग तय करेगा। प्रशासनिक अमले को सिर्फ 30 मिनट पहले बताया जाएगा कि सैंपलिंग कहां होनी है।

 

 

 

 

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