हाईकोर्ट ने दतिया मेडीकल कॉलेज में नर्सिंग अधीक्षक की नियुक्ति की निरस्त
दतिया. मेडीकल कॉलेज में नर्सिंग अधीक्षक पद पर हुई नियुक्ति को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ग्वालियर खंडपीठ ने गुरूवार का महत्वपूर्ण फैसला सुनाया गया है। न्यायमूर्ति आनंदसिंह बहरावत की एकल पीठ ने विजी अवस्थी की नियुक्ति को निरस्त कर दिया। हाईकोर्ट ने माना कि चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद विज्ञापन में तय मापदंडों से अलग जाकर किसी अभ्यर्थी को अलग से अंक नहीं दिये जा सकते हे। मामला वर्ष 2016 में जारी नर्सिंग अधीक्षक पद क विज्ञापन से जुडा हुआ है।
याचिकाकर्ता सविता पांडे ने नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। विज्ञापन में एमएससी नर्सिंग, बीएससी नर्सिंग या पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग जैसी योग्यता निर्धारित थी। चयन प्रक्रिया में विजि अवस्थी को पीएचडी डिग्री के आधार पर 10 अतिरिक्त अंक दिये गये। इसके बाद उनके कुल 79 अंक हो गये। 9 मई 2019 का उनकी नियुक्ति नर्सिंग अधीक्षक के पद पर कर दी गयी।
PHD के 10 अंक हटाने पर बदल गई पूरी मेरिट
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह तथ्य आया कि विज्ञापन में पीएचडी के लिए अतिरिक्त 10 अंक देने का कोई प्रावधान नहीं था। ऐसे में 79 अंकों में से 10 अंक हटाने पर विजि अवस्थी के अंक 69 रह जाते हैं, जबकि सविता पांडेय ने निर्धारित योग्यता के आधार पर 75 अंक हासिल किए थे। यानी अतिरिक्त अंक नहीं दिए जाते तो सविता पांडेय मेरिट में आगे रहतीं।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के के. मंजुश्री और संदीप श्रीराम वराडे मामलों में दिए फैसलों का भी हवाला दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भर्ती का विज्ञापन जारी होने और चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद चयन के मापदंड बदले नहीं जा सकते। साथ ही उच्च योग्यता होना अपने आप नियुक्ति का अधिकार नहीं देता, जब तक विज्ञापन में उसके लिए कोई विशेष लाभ या अतिरिक्त अंक का प्रावधान न हो। कोर्ट के इस फैसले के बाद मेडिकल कॉलेज दतिया में तत्कालीन डीन डॉ. राजेश गौर के कार्यकाल में हुई नर्सिंग अधीक्षक की यह नियुक्ति निरस्त हो गई है।

