96 वर्ष की आयु में समाधिस्थ हुए लालमणि जैन, हजारों श्रद्धालुओं ने नम आंखों से दी विदाई

ग्वालियर। जैन समाज के वरिष्ठ एवं श्रद्धेय संतस्वभावी व्यक्तित्व लालमणि जैन ने 96 वर्ष की आयु में समाधि धारण कर देह का त्याग कर दिया। उन्होंने 14 जुलाई से अन्न-जल का त्याग कर संथारा (सल्लेखना) व्रत धारण किया था। गुरुवार को उनके समाधिस्थ होने के बाद शहर में श्रद्धा और भावुकता का वातावरण रहा।

सुबह 8:30 बजे चंपाबाग बगीची से उनकी डोल यात्रा प्रारंभ हुई, जिसमें जैन समाज सहित विभिन्न वर्गों के हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। श्रद्धालु भक्ति, श्रद्धा और “णमोकार मंत्र” के जाप के साथ उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे।डोल यात्रा गस्त का ताजिया, डीडवाना ओली, सराफा बाजार, महाराज बाड़ा, मोर बाजार, दानाओली, नई सड़क और गेंडेवाली सड़क होते हुए शांतिनाथ वन पहुंची, जहां यात्रा का समापन हुआ। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और अनेक स्थानों पर समाजजनों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
अंतिम संस्कार से पूर्व विभिन्न धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के लिए समाजजनों ने श्रद्धापूर्वक बोलियां लगाईं। मुखाग्नि देने का सौभाग्य ₹1 लाख 11 हजार की बोली पर परिवार को प्राप्त हुआ। धागा की बोली ₹1 लाख, रथ को कंधा देने की बोली ₹1 लाख, अभिषेक की बोली ₹1 लाख तथा चिता पर विराजमान कराने की बोली ₹51 हजार में लगी। इसके बाद सुबह 11:30 बजे शांतिनाथ वन में अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
लालमणि जैन अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में दो पुत्र, दो बहुएं, दो नाती और चार पौत्र हैं।उनके समाधिस्थ होने से जैन समाज में शोक की लहर है। समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि लालमणि जैन का सादगीपूर्ण जीवन, धार्मिक आस्था और संयम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। हजारों लोगों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण रही कि उन्होंने अपने जीवन में समाज के बीच कितना सम्मान और स्नेह अर्जित किया था।

