इस साल प्यासा है तिघरा-2025 में 13 जुलाई को खुल गए थे गेट

ग्वालियर। पिछले साल हुई झमाझम बारिश के कारण तिघरा के 13 जुलाई को 3 बार गेट खोलने पड़े थे। जिससे 4000 क्यूसेक पानी सांक नदी में बहाया गया था। इस साल शहरभर की प्यास बुझाने वाला तिघरा 20 जुलाई को खुद प्यासा है। तिघरा के अंदर इस समय 12.60 एमसीएफटी पानी चल रहा है, जो कि बेहद कम है। इसके बाद भी तिघरा से प्रतिदिन शहर को 12.31 एमसीएफटी पानी की सप्लाई हो रही है। तिघरा की भराव क्षमता 740 फीट है, वर्तमान समय में तिघरा केवल 723 फीट तक भरा हुआ है। तिघरा को भरने के लिए 17 फीट पानी की आवश्यकता है। इस साल झमाझम बारिश हुए 1 माह का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक केवल 119 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि जुलाई माह में सामान्य बारिश का आंकड़ा 300 मिमी है। ऐसे में इस सीजन में औसत आंकड़े की आधी बारिश भी नहीं होने से तिघरा में पहुंचने वाली सभी नदियां सूखी पड़ी हुई हैं। वहीं दूसरी ओर तिघरा के गेट नहीं खुलने से जल संकट गहराने लगा है, क्योंकि 60% से अधिक क्षेत्रों को तिघरा से पानी की सप्लाई होती है।
17 फीट खाली हुआ तिघरा
तिघरा बांध 17 फीट खाली हो चुका है। तिघरा का आकार कटोरे की तरह है, नीचे कम पानी आता है, जबकि जितना तिघरा भरता है, उतना ही अधिक पानी इसमें समाता जाता है। तिघरा का फैलाव लगभग 5 किमी के क्षेत्रफल में माना जाता है।
पेहसारी से आ पाएगा पानी
अपर ककैटो, ककैटो और पेहसारी बांध से तिघरा में पानी सप्लाई किया जाता है। चूंकि इस साल बारिश कम हुई है, जिसके चलते वहां भी केवल 75% पानी ही डैमों में भर जाता है। पेहसारी बांध, ककैटो बांध में तिघरा के लिए 2000MCFT पानी रिजर्व रखा है, लेकिन वहां से 2000MCFT पानी छोड़ने के बाद तिघरा तक महज 500 MCFT पानी ही पहुंच सकेगा, जबकि 1500 MCFT पानी का लाइन लॉस होगा।
2025 साल 16 बार गेट खुले
तिघरा बांध के वर्ष 2012 में 11 अगस्त से 15 सितंबर के बीच 14 बार गेट खोले गए थे। जबकि वर्ष 2025 में तिघरा बांध के 16 बार गेट खोले गए थे। 18 सितंबर 2025 को तिघरा बांध का जलस्तर 739.70 फीट था। उस समय भी तिघरा बांध में लगातार सांक नदी से तिघरा बांध में 12 MCFT पानी की आवक हो रही थी, जिसे शहर में सप्लाई किया जा रहा था।
राजनीति ने बिगाड़ी तिघरा की हालत
नगर निगम की ओर से तिघरा बांध से एक दिन छोड़कर शहर में पानी सप्लाई करने का प्रस्ताव MIC को नगर निगम आयुक्त की ओर से 2 बार भेजा जा चुका है, लेकिन MIC और परिषद यह निर्णय नहीं ले पाई कि तिघरा से 1 दिन छोड़कर पानी देना चाहिए। क्योंकि कोई भी नेता नहीं चाहता है कि उसे नहीं चाहने कि लोगों को पानी कम मिलने का कारण वह बने। इसके चलते तिघरा का जलस्तर लगातार कम हो रहा है।

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