जीवाजी विश्वविद्यालय के विकास कार्यो में नगरनिगम का सेवा कर की वजह निर्माण में अड़गा
ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय (जेयू) में एक सूत्रीय बैठक का आयोजन किया गया, विशेष रूप से विश्वविद्यालय के विकास कार्यो को लेकर चर्चा की गयी है। इस बीच जेयू पर नगर निगम के कर को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई है। बैठक में विश्वविद्यालय के सीनियर अधिकारी भी शामिल हुए। गौरतलब है कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में कई निर्माण कार्य चल रहे हैं। जिन पर नगर निगम द्वारा रोक लगा दी गयी है। चर्चा है कि यह रोक नगर निगम द्वारा विश्वविद्यालय पर बकाया सेवा कर को लेकर लगाई गयी है। जिस वजह से करीब 50 करोड़ रूपये केविकास कार्य रूक गये हैं।
अधिकारियों के साथ बैठकर चर्चा करेंगे-कुलपति
बैठक के बाद कुलपति राजकुमार आचार्य ने बताया है कि नगर निगम के कर निर्धारण से संबंधित समस्या थी। जिसमें भुगतान के संबंध में विषय में कार्य-परिषद के समक्ष लाया गया था। कार्य-परिषद ने यह निर्णय लिया गया हैकि यदि नगर निगम के साथ विश्वविद्यालय की युक्तिसंगत व्यवस्था बन जाती है। भुगतान की प्रक्रिया के लिये कुलपति को अधिकृत किया गया है। नगरनिगम द्वारा पहले 14 करोड़ रूपये और बाद में 7 करोड की जानकारी पता चली थी। अब पुनः नगर निगम और जेयू के अधिकारी बैठककर चर्चा करेंगबे। वास्तव में कितनी राशि का भुगतान िकया जाना है। इसके चलते पीएम ऊपा योजना के तहत हो रहे भवन निर्माण कार्य बाधित हो गये है।
लगभग 12 करोड़ बकाया
नगर निगम का विश्वविद्यालय पर लगभग 12 करोड़ सेवा कर के रूप में बकाया है, जिसका भुगतान विश्वविद्यालय द्वारा लंबे समय से नहीं किया है। यही वजह है कि नगर निगम ने विश्वविद्यालय में चल रहे हॉस्टल निर्माण और अन्य रिनोवेशन कार्यों को अनुमति न लेने का हवाला देते हुए बंद करा दिया है। इस दौरान विश्वविद्यालय और नगर निगम के कर्मचारियों के बीच विवाद की तस्वीरें भी सामने आई थीं।
विश्वविद्यालय में चल रहे इन विकास कार्यों के लिए केंद्र सरकार द्वारा विशेष राशि उपलब्ध कराई गई है। यदि यह कार्य समय-सीमा के भीतर पूरे नहीं होते हैं, तो यह राशि केंद्र सरकार द्वारा वापस ले ली जाएगी। इससे विश्वविद्यालय के अधिकारियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। इसी को लेकर आज बैठक का आयोजन किया गया।

