दीनारपुर जमीन का मामला-प्रमुख सचिव की मंशा से भूमिका आगामी आचरण से स्पष्ट होगी-हाईकोर्ट
ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ की एकल बेंच ने दीनारपुर की 9 बीघा जमीन से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव की भूमिका अभी तक साफ नहीं है। हाईकोर्ट को शक है कि कार्यवाही में देरी कहीं निजी पक्ष को लाभ पहुंचाने के लिये तो नहीं की जा रही है। सोमवार की गयी सुनवाई में हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि प्रमुख सचिव राजस्व की मंशा आगे के व्यवहार से समझ में आयेगी। हाईकोर्ट ने इस मामले में एक दिन का और समय देते हुए अगली सुनवाई में 4 फरवरी तय की गयी है। इस केस से जुड़े एक अधिकारी राघवेन्दकुमार पांडे का पहले ही निधन हो चुका है। जबकि 5 अधिकारी रिटायर्ड हो चुके हैं।
दीनारपुर जमीन का मामला
दीनारपुर में 9 बीघा जमीन सीलिंग की है। इस जमीन को लेकर सरकार ने सिविल कोर्ट में केस किया था। लेकिन सरकार वहां हार गयी। इसके बाद वर्ष 2008 में फर्स्ट अपील की गयी थी। वर्ष 2012 में सही पैरवी न होने की वजह से खारिज हो गयी। हैरानी की बात यह है कि इस अपील को दोबारा चालू कराने केलिये 7 साल बाद, वर्ष 2019 में आवेदन दिया गया। अब इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में जस्टिस जीएस अहलूवालिया की बेंच कर रही है। हाईकोर्ट ने पूछा था कि इतने वर्षो तक कार्यवाही क्यों नहीं हुई। इसके लिये कौन जिम्मेदार है। लेकिन राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव कोई साफ जवाब नहीं दे पाये, इसी बात पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई।
कई अधिकारी रिटायर्ड हो चुके
राजस्व विभाग ने कोर्ट को बताया कि साल 2012 के बाद पदस्थ रहे कई अधिकारी अब रिटायर्ड हो चुके हैं। इनमें उमा करारे, अनुज कुमार रोहतगी, आरसी मिश्रा, कृपाराम शर्मा और रविनंदन तिवारी शामिल हैं। एसडीएम राघवेन्द्र कुमार पांडेय का साल 2020 में निधन हो गया था।वहीं अपर कलेक्टर सीबी प्रसाद, उपायुक्त अशोक चौहान और प्रशांत त्रिपाठी अभी भी सेवा में हैं। हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि अगर यह साबित होता है कि किसी अधिकारी ने जानबूझकर मामले को लटकाया, तो रिटायर्ड हो चुके अफसरों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि सरकारी जमीन को निजी लोगों के हाथों में जाने से रोकना जिम्मेदार अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

