पेयजल व्यवस्था निजी हाथों और आपूर्ति का काम, सरकारी खजाने पर हर महीने 20 करोड़ रूपये अतिरिक्त बोझ, हाईकोर्ट ने जारी किये नोटिस
ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ की एकल पीठ ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग (पीएचई) के अमले को नगरनिगम ने वापिस लेने जुड़े मामले में अब शासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। राज्य शासन को नोटिस, राज्य निर्माण विभाग कर्मचारी संघ ग्वालियर की तरफ से दायर याचिका पर जारी किया गया है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बतायाहै कि शहर की पेयजल आपूर्ति निजी हाथों में दे दी गयी है।इस कम्पनी को अपने स्वयं के कर्मचारी रखने थे। लेकिन कर्मचारी नहीं रखे गये है। पीएचई ने 1000 कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है। इसका प्रभाव शासन पर हर महीने लगभग 20 करोड़ रूपये के रूप में पड़ रहा है।
मामला क्या है
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का अमला नगर निगम से वापस लेने के मसले से जुड़े मामले में शंकर सिंह सेंगर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता देवेश शर्मा ने तर्क दिया कि वर्ष 1995 में पीएचई विभाग का संचालन अस्थायी रूप से दो वर्षों के लिए नगर निगम को सौंपा गया था। इसके बाद नगर निगम द्वारा ग्वालियर शहर में जल वितरण का कार्य किया जाने लगा। बाद में अमृत जल परियोजना के अंतर्गत विष्णु प्रकाश आर पुगलिया लिमिटेड कंपनी को पांच वर्षों के लिए जल वितरण एवं संधारण का कार्य सौंप दिया गया। याचिका में बताया गया कि पीएचई विभाग, भोपाल के मुख्य अभियंता ने 16 सितंबर 2022 को नगर निगम आयुक्त ग्वालियर को पत्र लिखकर पीएचई विभाग के अमले और कर्मचारियों को वापस बुलाने की मांग की थी। इसके बाद नगर निगम को कई पत्र भेजे गए। हालांकि, अनुबंध की शर्तों के अनुसार, संबंधित कंपनी को अपने कर्मचारियों की नियुक्ति करनी थी, जो नहीं की गई। इस स्थिति का सीधा असर दैनिक वेतनभोगी, स्थायी और कार्यभारित कर्मचारियों पर पड़ा है।
वेतन में परेशानी और पदोन्नति से वंचित है कर्मचारी
याचिकाकर्ता ने बताया है कि इस मामले में अब कर्मचारियों को वेतन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को नगर निगम में पदोन्नति और वरिष्ठता के लाभ सं वंचित किया जा रहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस व्यवस्था के चले मप्र शासन को हर माह 20 करोड़ रूपये का आथ्रिक नुकसान हो रहा है। ग्वालियर को स्वच्छ पेयजल की समुचित आपूर्ति भी नहीं मिल पा रही है। अदालत ने मामले में प्रस्तुत तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख सचिव, प्रमुख अभियंता पीएचई, प्रमुख अभियंता नगरनिगम, नगरनिगम आयुक्त व मुख्य अभियंता पीएचई को नोटिस जारी किया गया है। हाईकोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को 4 सप्ताह के अन्दर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिये है।

