बैन के बावजूद ग्वालियर में चल रहा करोंड़ों रुपये का ई-सिगरेट का धंधा

ग्वालियर. ई-सिगरेट पर सरकार की रोक धुंए में उड़ गई है। शहर के बाजारों में ई-सिगरेट का कारोबार रोजाना 10 लाख रुपये तक पहुंच गया है, यह आंकड़े बड़े हैं। ग्वालियर का ही यह हाल नहीं बल्कि प्रदेशभर के बड़े शहरों में इसका कारोबार फल फूल रहा है। हैरानी की बात यह है कि 10 से 15 साल के युवा इस ई-सिगरेट के नशे के आदी हो रहे हैं।
भारत सरकार ने ई-सिगरेट पर 2019 में लगाया था प्रतिबंध
भारत सरकार ने ई-सिगरेट पर 2019 में प्रतिबंध लगाया था और इसके बाद 2023 में दोबारा एक नोटिस जारी किया गया। यह 800 से लेकर 1500-2000 रुपये में दुकानों पर बेची जा रही हैं। सबसे ज्यादा यह शहर की पान की दुकानें, पान मसाला के प्वाइंटस आदि स्थानों पर बेचे जा रहे हैं। यह वेप सिगरेट के नाम से ट्रेंडी हैं। खुलेआम किसी को भी यह बेचा जा रहा है, जबकि यह खतरनाक साबित हो सकते हैं। आनलाइन यह तीन हजार रुपये तक में बेची जा रही हैं, इनके न कोई बिल हैं न कोई ब्रांड।
बता दें कि भारत सरकार ने इस पर प्रतिबंध को और सख्ती से लागू करने को 2023 में एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया। इसमें बताया गया कि इलेक्ट्रानिक सिगरेट का विज्ञापन न बनाएं और न ही इसमें हिस्सा लें। इसे किसी भी तरह से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा नहीं दें। इस सार्वजनिक नोटिस में मंत्रालय ने कहा कि इस अधिनियम के वैधानिक प्रविधानों के तहत इलेक्ट्रानिक सिगरेट के उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, ट्रांसपोर्ट, बिक्री (आनलाइन समेत), वितरण, भंडारण और विज्ञापन एक संज्ञेय अपराध है।

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