ग्वालियर में 8.37 बजे दिखा चांद, महिलाओं की चांद की पूजाकर खोला व्रत

ग्वालियर. आज करवाचौथ है। गणेशपुराण के मुताबिक कार्तिक मास की चर्तुर्थी को करका चतुर्थी या करवा चौथ कहते है। इस दिन महिलायें पति के लम्बी उम्र के लिये ब्रत करती है। उत्तर भारत में अलग-अलग इलाकों में करवाचौथ की 4 व्रत कथांये प्रचलित है। आमतौर पर पूजन के दोरान यह चारों कथांयें पढ़ी और सुनी जाती है।
महिलायें कैसे दें अर्घ्य
अगर पति-पत्नी के बीच में बेवजह झगड़ा होता है तो जल में ढेर सारे सफेद फूल डाकर चन्द्रमा को अर्घ्य दें। अगर पति -पत्नी के बीच में प्रेम कम हो रहा है तो जल में सफेद चंदन और पीलू फूल डालकर अर्घ्य दें। अगर पति-पत्नी के स्वास्थ्य के कारण वैवाहिक जीवन में बाधा आ रही है तो पति-पत्नी एक साथ चन्द्रमा को अर्घ्य दें। जल में जरा सा दूधए और अक्षत जरूर डाल लें। अगर नौकरी के कारण या जीवन में किसी अन्य वजह से पति-पत्नी के बीच में दूरिया आ गयी हैं तो शंख से जल अर्पित करें। जल में थोड़ा साइत्र मिला लें।
बता दें कि करवा चौथ के मौके पर सुहागिन महिलाओं ने पति की दीर्घायु और हेल्थ के लिए देशभर में आज व्रत रखा है। ये व्रत मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है. ऐसी मान्यता हैं कि इस दिन निर्जला व्रत रखने से पति को लंबी आयु का वरदान मिलता है। इस व्रत में सुहागिन महिलाएं शाम के वक्त चांद को देखने के बाद छलनी में पति का चेहरा देखती हैं और इसके बाद पति के हाथों से पानी पीती हैं और उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं।
इस दिन मूलतः भगवान गणेश, गौरी और चंद्रमा की पूजा का विधान है। चंद्रमा को सामान्यतः आयु, सुख और शांति का कारक माना जाता है। इसलिए चंद्रमा की पूजा करके महिलाएं वैवाहिक जीवन में सुख शांति और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। यही कारण है कि इस दिन सुहागनों को चांद निकलने का बेसब्री से इंतजार रहता है। आइए आपको बताते बताते हैं कि इस बार दिल्ली-एनसीआर सहित देश के अन्य हिस्सों में चांद निकलने का क्या समय बताया जा रहा है।

 

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