भारत: परंपरा एवं आधुनिकता का संगम” विषय पर एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संगोष्टी-प्रो शान्तिदेव सिसोदिया

ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययन शाला में आगामी 17-18 अक्टूबर को “भारत: परंपरा एवं आधुनिकता का संगम” विषय पर एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन होने जा रहा है। इस संगोष्टी का आयोजन प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययन शाला एवं जनजातीय अध्ययन एवं विकास केंद्र जीवाजी विश्वविद्यालय और मुंबई स्थित काश फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है, जो भारतीय संस्कृति, इतिहास और आधुनिकता के बीच के अंतर्संबंधों पर एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत कर का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि कैसे भारत की प्राचीन परंपराएं और आधुनिकता एक-दूसरे के साथ सह-अस्तित्व में हैं और एक दूसरे को समृद्ध करती हैं। इस आयोजन में न केवल भारतीय एवं विदेशी विद्वानों, बल्कि इटली, बोलिविया, इंडोनेशिया, नेपाल, श्रीलंका आदि देशों के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के विद्वान भी भाग लेंगे, जो इस संगोष्टी को वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान करेगा।
अंतर्राष्ट्रीय संगोष्टी के अंतर्गत कई उपविषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा, जिनमें शिक्षा, पर्यावरण, स्वास्थ्य, विरासत, पर्यटन, जनजातीय परंपरा, भू-राजनीति, भारतीय शिक्षा पद्धति, भारत की वैज्ञानिक परंपरा, सह-अस्तित्व, और प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति आदि विषय प्रमुख रूप से शामिल हैं। अब तक मध्य-प्रदेश,पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मिजोरम, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, बिहार, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों से शताधिक विद्वानों ने अपने मूल अनुसंधान पत्रों के वाचन की स्वीकृति दी है। यह सेमिनार भारतीय परंपरा और आधुनिकता के बीच के जटिल संबंधों को स्पष्ट करने का एक सशक्त मंच बनेगा। संगोष्टी में प्राचीन और आधुनिक भारतीय जीवन के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा होगी, जिससे नए शोध और विचारों को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में भारत में थाईलैंड के महावाणिज्य दूत डोनाविट पूलसावत उपस्थित रहेंगे, जो इस आयोजन को और अधिक गरिमामय बनाएंगे। जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर अविनाश तिवारी अध्यक्षता करेंगे एवं विशेष अतिथि के रूप में प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे कुलगुरु राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय, इस आयोजन में उपस्थित रहेंगे , जिनकी विद्वत्ता और नेतृत्व में यह संगोष्टी और भी सार्थक बनेगा,और इस उद्घाटन सत्र के अवसर पर “दो पुस्तको का विमोचन एवं समझौता ज्ञापन” किया जाएगा ।
कार्यक्रम के समापन सत्र में श्रीलंका के केलानिया विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष और वरिष्ठ व्याख्याता डॉ. वाडीनागल पन्नालोक द्वारा बीज वक्तव्य दिया जाएगा, जो भारतीय परंपरा और संस्कृति पर आधारित उनके गहन अनुभवों और दृष्टिकोणों को प्रस्तुत करेगा।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण
इस संगोष्टी का एक और आकर्षण है 19 अक्टूबर को अतिथि विद्वानों के लिए ग्वालियर नगर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण। इस भ्रमण के दौरान अतिथियों को ग्वालियर की समृद्ध विरासत, किले, मंदिरों और अन्य ऐतिहासिक स्थलों का अवलोकन कराया जाएगा। इससे अतिथि विद्वान ग्वालियर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के महत्व को समझ सकेंगे और अपने शोध के लिए नई प्रेरणा प्राप्त कर सकेंगे।इस भ्रमण के दौरान अतिथियों को ग्वालियर की समृद्ध विरासत, किले, मंदिरों और अन्य ऐतिहासिक स्थलों का अवलोकन कराया जाएगा
इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्टी में कुल 12 सत्रो का संचालन किया जाएगा जिनमे ऑनलाइन के 4 सत्र एवं ऑफलाइन के 8 सत्र होंगे , जिसमें देश-विदेश से आ रहे सहभागी अपने अनुसंधान पत्रों का वाचन करेंगे,जिनकी संख्या 200 से अधिक रहेगी ।

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