मप्र में आर्थिक गतिविधियां पटरी पर लौटीं
भोपाल. प्रदेश में कोरोना संकट के दौरान थमी आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे पटरी पर आती जा रही हैं। इसका असर अब सरकार के राजस्व पर भी नजर आने लगा है। अप्रैल से अगस्त 2021 तक वाणिज्यिक कर, पंजीयन और आबकारी से सरकार को पिछले साल के मुकाबले साढ़े सात हजार करोड़ रुपये अधिक राजस्व प्राप्त हुआ है। सिर्फ वृत्ति-कर से होने वाली आय पिछले साल की तुलना में डेढ़ प्रतिशत कम है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पिछले दिनों राजस्व प्राप्ति की स्थिति को लेकर समीक्षा की थी। इसमें वित्त विभाग ने जो रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, उसके मुताबिक अप्रैल से अगस्त 2021 के बीच वाणिज्यिक कर में छह हजार करोड़ रुपये राजस्व अधिक मिला है। राज्य के भीतर वस्तु और माल पर लगाए जाने वाले कर और एकीकृत माल और सेवा कर में लगभग 57 फीसद राजस्व अधिक मिला है। क्षतिपूर्ति चार हजार करोड़ रुपये की प्राप्त हुई है।
वहीं, अन्य करों के मामध्य से पौने छह हजार करोड़ रुपये से अधिक मिले हैं। पंजीयन से दो हजार 811 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है। पंजीयन में दो फीसद की छूट देने से रजिस्ट्री अधिक हुईं, जिसका फायदा सरकार को हुआ है। वहीं, महिलाओं के नाम संपत्ति का पंजीयन कराने से करीब 122 करोड़ रुपये का लाभ हुआ है।
आबकारी से तीन हजार 700 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है, जो पिछले साल इसी अवधि तक तीन हजार 46 करोड़ रुपये था। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल अप्रैल से अगस्त तक 17 हजार 139 करोड़ रुपये राजस्व मिला था, जो मौजूदा वित्तीय वर्ष में 24 हजार 971 करोड़ रुपये मिला है। राजस्व प्राप्ति के इस आंकड़े से साफ है कि प्रदेश में आर्थिक गतिविधियां तेजी के साथ बढ़ रही हैं। उधर, सरकार अब बड़े बकायादारों से वसूली के लिए सख्ती करेगी। इसके लिए सभी विभागों को सूची बनाकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रतिमाह मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के स्तर पर समीक्षा होगी।

